पैसे नहीं, दूध उगलेगा ATM! एमपी में आई गजब की मशीन, प्लास्टिक का उपयोग खत्म

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में पहली बार मिल्क एटीएम लगाया गया है, जो 24 घंटे शुद्ध और स्वच्छ दूध उपलब्ध कराएगा. यह मशीन 200 लीटर दूध स्टोर कर सकती है और कैश, कार्ड व QR स्कैन से भुगतान की सुविधा देती है. इस पहल से किसानों को लाभ मिलेगा और प्लास्टिक पैकिंग का उपयोग कम होगा.

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Milk ATM in Chhindwara: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में अब आधी रात या दोपहर में दूध के लिए भटकने की जरूरत नहीं. गुलाबरा इलाके में एक युवा उद्यमी आकाश सूर्यवंशी ने मिल्क एटीएम लगाकर 24 घंटे दूध उपलब्ध कराने की पहल शुरू की है. बड़े शहरों में देखे गए मॉडल से प्रेरित होकर उन्होंने इसे छिंदवाड़ा में शुरू किया, ताकि लोगों को किसी भी समय शुद्ध और स्वच्छ दूध मिल सके, वो भी सीधे मशीन से.

क्या है मिल्क एटीएम और कैसे करेगा काम?

मिल्क एटीएम बिल्कुल बैंक के एटीएम जैसा दिखता है, बस यह नोटों की जगह दूध “डिस्पैच” करता है. इसमें 200 लीटर दूध स्टोर किया जा सकता है और उचित तापमान पर 5 दिन तक सुरक्षित रहता है. मशीन में कैश, कार्ड और QR स्कैन तीनों विकल्प हैं. जितनी रकम डालें, उतनी मात्रा में दूध खुद-ब-खुद निकल आता है. इससे रात को या बीच दोपहर में भी दूध आसानी से मिल जाएगा.

किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए फायदे

आकाश सूर्यवंशी अपने गांव में दूध कलेक्शन सेंटर भी चलाते हैं. उनके मुताबिक, मिल्क एटीएम से दूध उत्पादकों और किसानों को बड़ा लाभ होगा वे 24×7 दूध जमा कर सकते हैं, जिससे सप्लाई बाधित नहीं होगी. दूसरी तरफ, शहरवासियों को तय कीमत पर शुद्ध, ताजा और स्वच्छ दूध मिलेगा. इस व्यवस्था से मिलावट की आशंका कम होती है और स्थानीय डेयरी नेटवर्क मज़बूत होता है.

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प्लास्टिक-मुक्त पहल 

मशीन से दूध लेते समय लोग अपने डिब्बे या बोतल लेकर आएंगे, जिससे प्लास्टिक पैकिंग का इस्तेमाल घटेगा. यह न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देता है, बल्कि शहर को प्लास्टिक कचरे से भी बचाता है. मिल्क एटीएम एक स्वच्छ, टिकाऊ और किफायती समाधान की दिशा में कदम है जहां सुविधा और पर्यावरण, दोनों का ख्याल रखा गया है.

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छिंदवाड़ा के लिए नई शुरुआत

गुलाबरा में लगा यह मिल्क एटीएम छिंदवाड़ा की स्टार्टअप संस्कृति और स्थानीय नवाचार की मिसाल है. लोगों की रोज़मर्रा की जरूरत को समझते हुए तकनीक के जरिए समाधान देने वाली यह पहल दिखाती है कि छोटे शहरों में भी बड़े विचार सफल हो सकते हैं. यदि यह मॉडल व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो दूध वितरण की तस्वीर बदल सकती है.

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