Khet Talab Yojana Scam: 588 खेत तालाबों की जमीनी हकीकत उजागर; कागज़ों में तालाब, ज़मीन पर फसलें

Khet Talab Yojana Scam: मैहर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बनाए गए 588 खेत तालाबों की जमीनी हकीकत उजागर हुई. कई स्थलों पर तालाबों की जगह फसलें मिलीं, निर्माण में अनियमितता और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ी. ग्रामीणों ने अधूरी खुदाई, मानक से कम गहराई और कागज़ों में ही तालाब दिखाने का आरोप लगाया, जबकि जिला पंचायत ने जांच की बात कही.

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Khet Talab Yojana Scam: 588 खेत तालाबों की जमीनी हकीकत उजागर; कागज़ों में तालाब, ज़मीन पर फसलें

Khet Talab Yojana Ghotala MP: मध्य प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी जल गंगा संवर्धन अभियान (Jal Ganga Samvardhan Abhiyan) के तहत मैहर क्षेत्र में भूजल स्तर सुधारने और वर्षा जल संरक्षण के लिए लगभग 588 खेत तालाबों का निर्माण किया गया था. लेकिन इन तालाबों की जमीनी स्थिति बिल्कुल उलट सामने आ रही है. कई जगहों पर जहाँ तालाब होना चाहिए था, वहाँ गेहूं, चना, मसूर की फसलें लहलहा रही हैं, जिससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं. मौजूदा हालात बताते हैं कि कई तालाब सिर्फ कागज़ों में ही बने, जमीन पर उनका अस्तित्व नाम मात्र का है.

Khet Talab Yojana Scam: मैहर में खेत तालाब की खुली पोल

ग्रामीणों का क्या कहना है?

ग्रामीणों ने बताया कि कई स्थानों पर स्वीकृत तालाबों की खुदाई अधूरी रही या मानक के अनुरूप गहराई‑चौड़ाई नहीं बनाई गई. परिणामस्वरूप बरसात के बाद भी तालाबों में जलभराव नहीं हुआ और कुछ समय बाद उन्हें समतल कर खेती कर दी गई. ग्रामीणों का कहना है कि यदि तालाब सही तरीके से बने होते तो वर्षा जल संग्रहण होता और आसपास के हैंडपंपों व कुओं का जलस्तर बेहतर हो सकता था.

मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल: निरीक्षण किसने किया?

सबसे बड़ी चिंता यह है कि जब तालाब निर्माण का भुगतान कर दिया गया, तो गुणवत्ता जांच किसने की? क्या विभागीय अधिकारियों ने वास्तविक स्थल निरीक्षण किया था या फाइलों में ही काम पूरा मान लिया गया? इस प्रक्रियागत कमी ने पूरे अभियान की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं. जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की माँग की है. उनका कहना है कि यदि अनियमितताएँ साबित होती हैं, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण अभियान की साख कायम रहे और सरकारी धन की बर्बादी रोकी जा सके.

तीनों ब्लॉकों का आंकड़ा: ज्यादातर तालाब कागज़ों में ही बने

मैहर जिले के तीनों ब्लॉकों में स्वीकृत तालाबों की संख्या:

  • मैहर ब्लॉक : 290 तालाब
  • अमरपाटन ब्लॉक : 75 तालाब
  • रामनगर ब्लॉक : 223 तालाब

NDTV टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में अधिकांश जगहों पर तालाब की जगह खेत मिले. ग्राम पंचायत देवरामोलहाई, सोनाडी, गोविंदपुर, सगौनी, खोडरी, जुड़मानी सहित कई पंचायतों में वास्तविक स्थिति निराशाजनक रही. गाँव वालों का आरोप है कि कई पंचायतों ने बिना वास्तविक कार्य के ही भुगतान निकाल लिया. जिला पंचायत सीईओ ने NDTV से कहा कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी.

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