Maha Shivratri 2025: आज यानी 26 फरवरी को पूरे देश में धूमधाम से शिव भक्त महाशिवरात्रि का महापर्व मना रहे हैं. आज सुबह से ही शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. लोग विधि विधान से भगवान शिव की पूजा अर्चना कर रहे हैं. महाशिवरात्रि के मौके पर आज हम आपको बताएंगे जबलपुर के एक ऐसे ही अनोखे मंदिर के बारे में जहां बड़े महादेव की प्रतिमा देखने लोग अनायास ही चले आते हैं.
कचनार सिटी में विराजे 76 फीट ऊंचे महादेव
कचनार सिटी शिव मंदिर मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जिसे भगवान शिव को समर्पित किया गया है. यह मंदिर अपनी भव्यता, ऊंची शिव प्रतिमा और धार्मिक महत्व के कारण दूर-दूर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. दरअसल, खुले आसमान के नीचे भगवान शिव की खूबसूरत करीब 76 फीट ऊंची प्रतिमा विराजमान है. ध्यान मुद्रा में बैठे शिव की प्रतिमा के सामने ही उनके सेवक नंदी भी बड़े स्वरूप में खड़े हैं.
कचनार सिटी शिव मंदिर की खासियत
1. विशाल शिव प्रतिमाय- मंदिर में 76 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित है, जो पूरे क्षेत्र में एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है. यह प्रतिमा शिव के दिव्य और शांत स्वरूप को दर्शाती है.
2. गुफा मंदिर- इस मंदिर के नीचे एक गुफा संरचना बनाई गई है, जिसमें बारह ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियाँ स्थापित हैं. इससे श्रद्धालु विभिन्न ज्योतिर्लिंगों के दर्शन एक ही स्थान पर कर सकते हैं.
3. पर्यावरण और संरचना- मंदिर का निर्माण सुंदर हरियाली से घिरे वातावरण में किया गया है, जिससे यह स्थल एक शांत और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है.
इस खास मौके पर होता है धार्मिक आयोजन
महाशिवरात्रि पर यहां विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है.
सावन माह में बड़ी संख्या में भक्त जलाभिषेक करने आते हैं.
श्रावण सोमवार को यहां विशेष भीड़ रहती है.
पर्यटन और आस्था केंद्र है कचनार सिटी शिव मंदिर
यह मंदिर धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ जबलपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में भी गिना जाता है. यहां आने वाले पर्यटक भव्य शिव प्रतिमा और मंदिर परिसर की सुंदरता का आनंद लेते हैं.
कचनार सिटी शिव मंदिर कैसे पहुंचे?
कचनार सिटी शिव मंदिर मध्य प्रदेश के जबलपुर के विजय नगर में स्थित है. यह जबलपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 6-7 किमी दूर और जबलपुर डुमना एयरपोर्ट से लगभग 20 किमी दूर स्थित है. आप यहां से बस, ऑटो आदि से कचनार सिटी शिव मंदिर पहुंच सकते हैं. बता दें कि यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम भी है.
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