गांव का नाम है 'नई दिल्ली'...बुनियादी सुविधाओं के नाम पर है फिसड्डी

आपको जानकर हैरत होगी कि देश में एक नहीं दो-दो 'नई दिल्ली' है...एक तो देश की राजधानी दिल्ली है जो चमक-दमक और पावर से लबरेज है और दूसरा है मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में मौजूद एक छोटा सा गांव. इसका नाम भले ही नई दिल्ली हो लेकिन यहां के लोग विकास के लिए तरस रहे हैं.

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आपको जानकर हैरत होगी कि देश में एक नहीं दो-दो 'नई दिल्ली' है...एक तो देश की राजधानी दिल्ली है जो चमक-दमक और पावर से लबरेज है और दूसरा है मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में मौजूद एक छोटा सा गांव. इसका नाम भले ही नई दिल्ली हो लेकिन यहां के लोग विकास के लिए तरस रहे हैं. यहां की सड़कें ऐसी हैं कि जरा सी बारिश हो तो गांव का संपर्क शहर से कट जाता है. न तो यहां मुख्यमंत्री नल-जल योजना पहुंची है और न ही बिजली के आने-जाने की कोई नियत समय है. 

बारिश में एंबुलेंस भी नहीं पहुंची पाती

गांव की सड़कों की ऐसी है हालत, एंबुलेंस को आने के लिए रास्ता ही नहीं मिलता

नई दिल्ली नाम का ये गांव गंजबासोदा तहसील की ग्राम पंचायत हरदुखेड़ी में है. करीब ढाई हजार की आबादी यहां सालों से रह रही है लेकिन सालों से उनके गांव में विकास की रोशनी नहीं पहुंची है. गांववालों का कहना है कि सरकारें आती-जाती हैं लेकिन उनके गांव की स्थिति कभी नहीं सुधरती. जब भी तेज बारिश होती है उनका संपर्क शहर से पूरी तरह से कट जाता है सड़कें दलदल में तब्दील हो जाती है. बारिश के समय अगर कोई मरीज बीमार हो जाए तो गांव तक एंबुलेंस ही नही पहुंच पाती गर्भवती महिलाओं का प्रसव भी घरों में ही कराना होता है जिससे महिलाओं की जान का खतरा भी रहता है. 

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रात भर बिजली रहती है गुल 

नई दिल्ली के रहवासियों के मुताबिक यहां बिजली कटौती का कोई नियत समय नहीं है. बिजली जाने का समय तो रहता है पर बिजली आने का कोई समय नहीं रहता. रात-रात भर बिजली नहीं रहने से गांव की महिला , बच्चों ,बुजुर्गों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.  

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मुख्यमंत्री नल जल योजना भी नहीं पहुंची गांव में 

पानी की टंकी का निर्माण तो शुरू हो गया लेकिन पूरा कब होगा ये कोई नहीं बताता

हर घर जल पहुंचाने वाली मुख्यमंत्री नल जल योजना भी इस गांव तक नहीं पहुंच पाई है. पंचायत द्वारा सालों से एक पानी की टंकी का निर्माण कराया जा रहा है लेकिन अब भी वो अधूरा है. ऐसे में गांव के लोगों का सहारा यहां मौजूद एकमात्र हैंडपंप है. इसी पर पूरा गांव निर्भर है. कभी-कभी उस हैंडपंप में भी खराबी आ जाती है तो गांव वाले बूंद-बूंद के लिए तरस जाते हैं. 

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सरपंच का दावा- सिस्टम साथ नहीं दे रहा

गांव के सरपंचअशोक कुशवाह बड़े दुख के साथ कहते हैं कि उनका सपना है कि जैसा गांव का नाम है वैसा विकास भी यहां हो. उन्होंने अपनी ओर से प्रशासन को बजट भी बताया लेकिन यहां के विकास के लिए राशि आवंटित नहीं हुई. गांव में बिजली,सड़क और पाने के पानी का इंतजाम करने की आवश्यकता है. 

पंचायत CEO ने कहा- कारणों की जांच होगी

जिले भर में करीब 1500 गांव हैं. यह गंजबासोदा तहसील का मामला है. इस गांव में सरकारी योजनाओं का लाभ क्यों नहीं मिल पाया इसकी मुझे जानकारी नहीं है. आपने हालात बताए हैं तो मैं इसकी जांच कराऊंगा.  

योगेश भरसट

विदिशा जिला पंचायत सीईओ

जाहिर है गांव में समस्याओं का अंत नहीं है लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के पास कोई माकूल जवाब नहीं है. ये हालत तब है जबकि गांव की पंचायत लगातार अधिकारियों को हालात की जानकारी दिए जाने का दावा करती है. 

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