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This Article is From Dec 22, 2025

MP में व्यापम-नर्सिंग के बाद अब पैरामेडिकल 'खेल' :बैकडेट मान्यता और जर्जर कॉलेज,48 हजार छात्र बेहाल

MP Medical Education Fraud: मप्र में व्यापम और नर्सिंग घोटाले के बाद अब पैरामेडिकल की पढ़ाई में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है. एनडीटीवी की ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कैसे जर्जर कॉलेजों को बैकडेट में मान्यता दी गई और 48,000 छात्रों का भविष्य अधर में लटका दिया गया. जानिए कैसे 2025 में 12वीं पास करने वाले छात्रों को 2023 के सत्र में दाखिला दिया जा रहा है.

MP में व्यापम-नर्सिंग के बाद अब पैरामेडिकल 'खेल' :बैकडेट मान्यता और जर्जर कॉलेज,48 हजार छात्र बेहाल

MP Paramedical Education Scam: मध्यप्रदेश में एक बार फिर चिकित्सा शिक्षा के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है. व्यापम और नर्सिंग घोटाले की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि पैरामेडिकल की पढ़ाई में मचे 'गड़बड़झाले' ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की चूलें हिला दी हैं. एनडीटीवी की ग्राउंड रिपोर्ट में जो सच सामने आया है, वो डराने वाला है. यह सिर्फ परीक्षाओं की लेटलतीफी या कागजों की हेराफेरी का मामला नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश के पूरे हेल्थ सिस्टम को पंगु बनाने की एक साजिश जैसी लगती है. सोचिए, जब अस्पतालों में आपका इलाज वो छात्र करेंगे जिन्होंने टूटी कुर्सियों और जालों से भरी लैब में बिना किसी प्रैक्टिकल के डिग्री हासिल की है, तो आपकी जान कितनी सुरक्षित होगी?

 NDTV  की ग्राउंड रिपोर्ट में यह सच सामने आया है कि कैसे दो-तीन कमरों के कॉलेज, जालों से भरी लैब और बंद पड़े क्लासरूम के भरोसे हजारों छात्रों का करियर दांव पर लगा है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मध्यप्रदेश देश का शायद इकलौता ऐसा राज्य बन गया है, जहाँ छात्र 2025 में 12वीं पास कर रहा है लेकिन उसे बैकडेट में 2023 के सत्र में दाखिला दिया जा रहा है.

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खंडहरनुमा कॉलेजों में 'डिग्री' का खेल 

सबसे पहले हम पहुंचे राजधानी भोपाल के ही सनखेड़ी में स्थित आष्युमान कॉलेज. यहां की तस्वीरें हमें गवाही दे रही थीं कि यहां पढ़ाई नहीं, बल्कि भविष्य की कब्र खोदी जा रही है. बाहर 2022-23 सत्र का बोर्ड लगा है, लेकिन अंदर क्लासरूम वीरान हैं और लैब में जाले जमे हैं. यहां मौजूद एक महिला कर्मचारी खुद दबी जुबान में मानती हैं कि महीनों से कोई छात्र यहां नहीं आया. कॉलेज के चौकीदार सुरेश कहते हैं, "मैं 2-3 महीने से यहां हूं, छात्र सिर्फ परीक्षा के वक्त ही नजर आते हैं." जब हमने सुरेश से और सवाल पूछे तो उन्होंने कॉलेज के शिक्षक गोविंद से हमारी बात कराई. गोविंद ने हमें फोन पर कुछ और ही दावा किया. उनका कहना है कि कोर्स बंद है और सिर्फ फेल हुए छात्रों की परीक्षा कराई जा रही है. लेकिन सवाल यह है कि अगर छात्र 2 साल से क्लास ही नहीं आए, तो वे परीक्षा कैसे दे रहे हैं? राजधानी के श्रीराम कॉलेज, व्यक्सल इंस्टीट्यूट और व्हीआईपी पैरामेडिकल जैसे संस्थानों का भी यही हाल है, जहां ज्यादातर ने 'कोर्स बंद' होने का बोर्ड लटका दिया है.

Paramedical Scam: पैरामेडिकल कॉलेज में आपको इस तरह की हालत में बोर्ड मिल जाएंगे तो यहां की व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं.

Paramedical Scam: पैरामेडिकल कॉलेज में आपको इस तरह की हालत में बोर्ड मिल जाएंगे तो यहां की व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं.
Photo Credit: अनुराग द्वारी

कैबिनेट का यू-टर्न और बैकडेट में मान्यता की 'साजिश'

इस घोटाले की जड़ें सरकारी फाइलों में दबी हैं. याचिकाकर्ता विशाल बघेल का खुलासा चौंकाने वाला है. दरअसल, पैरामेडिकल काउंसिल को भंग कर 'मप्र एलाइड हेल्थ काउंसिल' बनाने की तैयारी हुई थी. लेकिन भंग होने से पहले ही पुराने सत्रों के आवेदन आ चुके थे. जब सरकार को लगा कि नई काउंसिल के लिए पूरी प्रक्रिया दोबारा करनी होगी, तो आनन-फानन में पुरानी काउंसिल को दोबारा जीवित किया गया. इसी 'लीगल लूपहोल' का फायदा उठाकर कॉलेजों को बैकडेट में मान्यता जारी की गई.जिसकी वजह से आज आलम यह है कि 2025 में पासआउट छात्र का एडमिशन ईयर 2023 लिखा जा रहा है. जब हमने पूरे मसले पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से बात की तो उन्होंने कहा- "सब समय पर हो जाएगा," लेकिन असलियत यह है कि सरकारी तंत्र अपनी गलतियों को सुधारने के नाम पर नई गलतियां कर रहा है.

MP Paramedical Scam: कुछ कॉलेज में प्रयोगशाला तो हैं लेकिन उन पर भी ताले जड़े हुए हैं.

MP Paramedical Scam: कुछ कॉलेज में प्रयोगशाला तो हैं लेकिन उन पर भी ताले जड़े हुए हैं.
Photo Credit: अनुराग द्वारी

छात्रों का दर्द: "MBBS हो जाता, पर पैरामेडिकल पूरा नहीं हो रहा"

बहरहाल हमारी टीम भोपाल से 200 किलोमीटर दूर आगर-मालवा और खंडवा के सरकारी कॉलेजों तक पहुंची. हमें वहां भी यही सन्नाटा मिला. यहां पर छात्रा मदीहा खान और हर्षिता सूर्यवंशी का कहना है कि फर्स्ट ईयर पढ़ते हुए 3 साल बीत चुके हैं. बड़वानी की दीपिका पाटीदार कहती हैं, "साढ़े 4 साल का कोर्स 8 साल में पूरा होने का डर है, घरवाले अब शादी का दबाव बना रहे हैं." खंडवा मेडिकल कॉलेज की खुशी पटेल और मरीन गिनवा का दर्द है कि 2021 में आए सीनियर्स का भी ग्रेजुएशन अब तक पूरा नहीं हुआ. सतना के विंध्य कॉलेज के चेयरमैन डॉ. पंकज सिंह परिहार खुद मानते हैं कि 3 साल का कोर्स 5 साल में खींचने से छात्र और पेरेंट्स दोनों डिप्रेशन में हैं.

MP Paramedical Scam: पैरामेडिकल कॉलेज की इमारतें किस हालात में हैं ये तस्वीर ये बयां करता है

MP Paramedical Scam: पैरामेडिकल कॉलेज की इमारतें किस हालात में हैं ये तस्वीर ये बयां करता है
Photo Credit: अनुराग द्वारी

नर्सिंग घोटाला: आदिवासी अंचलों में छात्र बेहाल

जब हम आदिवासी बहुल बैतूल के विज़न कॉलेज आफ़ नर्सिंग में पहुंचे तो वहां की स्थिति ने भी हमें चौंकाया. इस कॉलेज में 300 छात्र का दाखिला दर्ज है, लेकिन मौके पर हमें सिर्फ 10 मिले. यहां भी लेट-लतीफी का आलम साफ दिखाई दिया. 2022-23 बैच की छात्रा मोनिका जाट और अर्पिता झरबड़े बताती हैं कि  थर्ड ईयर तक पहुंचने के बजाय वे अब तक फर्स्ट ईयर के नतीजों का इंतजार कर रही हैं. छात्रा स्वाति पवार और जयश्री झरबड़े का कहना है कि स्कॉलरशिप नहीं आ रही, रूम रेंट देने के पैसे नहीं हैं और भविष्य अंधेरे में है. बड़वानी के नर्सिंग कॉलेजों में भी हालत खराब है.

योगेश्वर नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल मंजू जैकब और संजीवनी कॉलेज की निदेशक डॉ. रश्मि पाटीदार बताती हैं कि जिन बच्चों को 12वीं पास करके एडमिशन लेना है उनकी अभी तक काउंसलिंग की प्रक्रिया ही चल रही है. नर्सिंग की छात्राएं रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद निकल नहीं पा रही हैं.

उनके मुताबिक सरकारी पॉलिसियों की वजह से एडमिशन और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया इतनी लेट हो गई है कि अस्पताल और जनता दोनों को इसका भारी नुकसान होगा. 

पंगु होता हेल्थ सिस्टम: कौन है जिम्मेदार?

हालात ये हैं कि प्रदेश के 21 सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में से केवल 8 को मान्यता मिली है और 38 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं. मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ. राजेंद्र शुक्ला पैरामेडिकल काउंसिल के पदेन चेयरमैन हैं, फिर भी उनकी नाक के नीचे बैकडेट में मान्यता का खेल चल रहा है. छात्रों की सिर्फ एक मांग है- 3 साल का कोर्स 3 साल में पूरा हो, 5 या 6 साल में नहीं.असल जिंदगी में देखा जाए तो डॉक्टर दो मिनट देखकर चले जाते हैं, लेकिन मरीज की 24 घंटे देखरेख करने वाले ये छात्र आज बिना असल पढ़ाई और बिना प्रैक्टिकल के सिर्फ 'कागजी डिग्री' लेकर निकल रहे हैं. अगर इन्हें समय पर और पूरी शिक्षा के साथ तैयार नहीं किया गया, तो प्रदेश के अस्पतालों में प्रशिक्षित स्टाफ का अकाल पड़ जाएगा, जिसकी कीमत मरीजों को अपनी जान देकर चुकानी होगी.
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