FM Jagdish Devda Speech: मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष' घोषित करते हुए कृषि क्षेत्र को बजट की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा है. इस वर्ष का कृषि बजट केवल परंपरागत सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन क्षमता सुधारने और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की व्यापक रणनीति के साथ तैयार किया गया है. सरकार का दावा है कि यह बजट खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में ठोस कदम साबित होगा.
कृषि क्षेत्र में 1.15 लाख करोड़ से अधिक का प्रावधान
कृषि को मजबूत आधार देने के लिए कुल ₹1,15,013 करोड़ (अन्य वित्तीय संसाधनों सहित) का प्रावधान किया गया है. इसमें विभिन्न मदों के लिए अलग-अलग राशि निर्धारित की गई है. इसके तहत उत्पादन एवं उत्पादकता वृद्धि के लिए ₹28,158 करोड़ रुपये, कृषि आदान व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए ₹64,995 करोड़ रुपये, उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए ₹8,091 करोड़ रुपये और सुरक्षा चक्र यानी बीमा वगैरह के लिए ₹13,769 करोड़ रुपये के प्रावधान किए गए हैं. इसके अलावा किसानों को आसान वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए ₹25,000 करोड़ का कृषि ऋण लक्ष्य भी तय किया गया है.
सोलर सिंचाई से खेती को ऊर्जा
प्रधानमंत्री कृषक सौर सिंचाई योजना के तहत ₹3,000 करोड़ की लागत से एक लाख सोलर सिंचाई पंप किसानों को उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है. इसका उद्देश्य सिंचाई खर्च कम करना, बिजली पर निर्भरता घटाना और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है. सरकार का मानना है कि सोलर पंपों से किसानों को दिन में ही सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे उत्पादन लागत में कमी और आय में वृद्धि की संभावना है.
राष्ट्रीय सिंचाई परियोजनाओं पर जोर
प्रदेश में दीर्घकालिक जल प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए दो बड़ी राष्ट्रीय परियोजनाओं पर कार्य जारी है. इनमें केन बेतवा लिंक परियोजना और पार्वती कालीसिंध परियोजना पर तेजी से काम करने की बात कही गई है. गौरतलब है कि इन दोनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत ₹79,605 करोड़ है.
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इनके पूरा होने से लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है, जिससे कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो 2026 वास्तव में प्रदेश के किसानों के लिए बदलाव का वर्ष साबित हो सकता है.
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