एलपीजी की किल्लत की अफवाह बनी जानलेवा, लोग नदी पार कर जंगल से ला रहे हैं लकड़ी

LPG Cylender News: गैस सिलेंडर की कथित किल्लत की वह अफवाह है, जिसने पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा कर दिया है. लिहाजा, लोगों ने एहतियात के तौर पर गैस पर निर्भर रहना कम कर लकड़ी का सहारा लेना शुरू कर दिया है. हालात ये है कि महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे-छोटे बच्चे तक लकड़ी लाने के लिए नदी पार करके दूसरी ओर जा रहे हैं, ताकि घर का चूल्हा जल सके. यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं है.

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एलपीजी की किलल्त की आफवाह बनी जानलेवा, लोग नदी पार कर जंगल से ला रहे हैं लकड़ी
Mayank Dubey

LPG Crisis in Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के निवाड़ी (Niwari) जिले की पर्यटन नगरी ओरछा (Orchha) से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो विकास के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है. दरअसल, यहां लोग पेट की आग बुझाने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा रहे हैं.

इसकी वजह है गैस सिलेंडर की कथित किल्लत की वह अफवाह है, जिसने पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा कर दिया है. लिहाजा, लोगों ने एहतियात के तौर पर गैस पर निर्भर रहना कम कर लकड़ी का सहारा लेना शुरू कर दिया है. इस डर ने एक सामान्य स्थिति को संकट में बदल दिया.

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नदी पार कर लड़की इकठ्ठा कर रहे हैं लोग

ओरछा तहसील में इन दिनों एक अजीब और खतरनाक स्थिति बनी हुई है. गैस सिलेंडर की कथित किल्लत की अफवाह ने लोगों के मन में इतना डर बैठा दिया है कि वे जोखिम भरे रास्ते अपनाने को मजबूर हो गए हैं. हालात ये है कि महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे-छोटे बच्चे तक लकड़ी लाने के लिए नदी पार करके दूसरी ओर जा रहे हैं, ताकि घर का चूल्हा जल सके. यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं है. फिसलन भरे पत्थर, गहरी धारा और हर कदम पर मौत का खतरा, लेकिन मजबूरी इतनी बड़ी है कि लोग इन खतरों को नजरअंदाज कर रहे हैं. गैस सिलेंडर की कमी की अफवाह ने लोगों को मानो फिर से पुराने दौर में धकेल दिया है, जहां लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाना ही एकमात्र विकल्प था.

 उज्ज्वला योजना के बावजूद पीछे लौटते कदम

सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल उज्ज्वला योजना के तहत लोगों को गैस चूल्हे और सिलेंडर उपलब्ध कराए गए थे, ताकि धुएं और प्रदूषण से मुक्ति मिल सके. लेकिन मौजूदा हालात में लोग एक बार फिर लकड़ी के चूल्हों की ओर लौट रहे हैं. इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है. धुएं से होने वाली बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन पेट की आग के आगे ये चिंताएं छोटी पड़ जाती हैं.

प्रशासन का दावा, पर्याप्त है एलपीजी स्टॉक

इस पूरे मामले में प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जिले में गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है. खाद्य आपूर्ति अधिकारी सरिता अग्रवाल के अनुसार, प्रतिदिन 1326 गैस सिलेंडर का स्टॉक उपलब्ध है, जबकि केवल 590 सिलेंडर की ही बुकिंग हो रही है. अधिकारियों का मानना है कि यह पूरी स्थिति केवल अफवाह का परिणाम है, जिसने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है और उन्हें सुरक्षित विकल्पों की बजाय जोखिम भरे रास्तों की ओर धकेल दिया है.

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ओरछा की यह तस्वीर सिर्फ एक इलाके की समस्या नहीं, बल्कि यह बताती है कि अफवाहें किस तरह समाज को प्रभावित कर सकती हैं. जरूरत है जागरूकता की, सही जानकारी के प्रसार की और प्रशासन व जनता के बीच भरोसे को मजबूत करने की, ताकि ऐसी खतरनाक परिस्थितियों से बचा जा सके.

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