Liquor Ban in MP: आस्था और संस्कृति के आगे राजस्व मायने नहीं रखता, शराबबंदी पर बोले मोहन सरकार के मंत्री

Liquor Ban in Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश की नई आबकारी नीति (New Excise Policy 2025-26) के तहत 19 धार्मिक शहरों में शराब पर बैन लगाया गया है. इसमें महाकाल की नगरी, ओंकारेश्वर जैसे धर्मस्थल शामिल हैं.

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Liquor Ban: मध्य प्रदेश के 19 पवित्र स्थानों पर मंगलवार से शराबबंदी लागू कर दी गई. इस पर राज्य के लघु एवं सूक्ष्म उद्योग मंत्री चैतन्य काश्यप (Chetanya Kasyap) ने कहा कि यह कदम हमारी संस्कृति के उज्ज्वल पक्ष को आगे बढ़ाएगी. राज्य की मोहन यादव सरकार ने 25 जनवरी को महेश्वर में हुई कैबिनेट बैठक में 19 पवित्र स्थलों पर शराबबंदी का फैसला लिया था, जिस पर मंगलवार से अमल शुरू हो गया.

चैतन्य काश्यप ने कहा कि मध्य प्रदेश के 19 महत्वपूर्ण स्थानों को पवित्र नगरों का दर्जा दिया गया है. यह हमारी संस्कृति के उज्ज्वल पक्ष को आगे बढ़ाएग.। इन शहरों की पवित्रता को बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है. इस निर्णय से जहां तक राजस्व कम होने की बात है, आस्था, पवित्रता और हमारी संस्कृति के गौरव को बढ़ाने में राजस्व इतना बड़ा महत्व नहीं रखता.

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पहले शराबबंदी में क्षेत्र नहीं थे निर्धारित

राज्य के 19 स्थानों पर शराबबंदी किए जाने पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने पहले भी नर्मदा नदी के उद्गम स्थल से आगे तक के लिए शराबबंदी की थी, मगर क्षेत्र निर्धारित नहीं था. अब क्षेत्र निर्धारित कर दिए गए हैं. यह पहले की शराबबंदी का संशोधित रूप है.

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इन जगहों पर शराब बैन

राज्य में मंगलवार से जिन धार्मिक स्थानों पर शराब बंदी की गई, उनमें एक नगर निगम, छह नगर पालिका, छह नगर परिषद और छह ग्राम पंचायतें हैं, जिन प्रमुख पवित्र नगरों में शराबबंदी लागू की गई है, उनमें बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन, प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी का उद्गम अमरकंटक, महेश्वर, ओरछा रामराजा मंदिर क्षेत्र, ओंकारेश्वर, मंडला में सतधारा क्षेत्र, मुलताई में ताप्ती उद्गम क्षेत्र, पीतांबरा देवीपीठ दतिया, जबलपुर भेड़ा घाट क्षेत्र, चित्रकूट, मैहर, सलकनपुर, सांची, मंडलेश्वर, वान्द्रावान, खजुराहो, नलखेड़ा, पशुपतिनाथ मंदिर क्षेत्र मंदसौर, बरमान घाट और पन्ना शामिल हैं.

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