किन्नर की 'घर वापसी'! सितारा गुरु बनीं सीता, महादेवगढ़ मंदिर में अपनाया सनातन धर्म

एमपी के खंडवा स्थित महादेवगढ़ मंदिर में किन्नर वाहिद अहमद उर्फ़ सितारा गुरु ने वैदिक विधियों के साथ सनातन धर्म अपनाकर ‘सीता’ नाम से नई शुरुआत की. इस मौके पर किन्नर समुदाय ने मंदिर में पहुंचकर जश्न मनाया.

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Kinnar Ghar Wapsi: एमपी के खंडवा के महादेवगढ़ मंदिर में सोमवार को किन्नर वाहिद अहमद उर्फ सितारा गुरु ने वैदिक विधि‑विधान के साथ सनातन धर्म अपनाकर अपनी “घर वापसी” की घोषणा की. अब वे ‘सीता' नाम से जानी जाएंगी. उनके इस निर्णय के बाद शहर के कई किन्नर मंदिर पहुंचे और जश्न मनाया.  

महादेवगढ़ मंदिर में सितारा गुरु ने अपनाया सनातन धर्म

खंडवा के महादेवगढ़ मंदिर में आज वाहिद अहमद उर्फ़ सितारा गुरु ने वैदिक मंत्रोच्चार और रीति‑रिवाजों के साथ सनातन धर्म धारण किया. किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर सौम्या सखी और वैदिक ब्राह्मणों ने विधि‑विधान से उनका धर्म परिवर्तन करवाया. अब उनका नया नाम ‘सीता' रखा गया है. इस मौके पर मौजूद किन्नरों ने मंदिर परिसर में खुशी जताई और एक-दूसरे को बधाई दी.

मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगा- सीता  

धर्म परिवर्तन के बाद सीता ने कहा कि वे आज भोलेनाथ के प्राचीन मंदिर में आकर बेहद खुश हैं. उन्होंने बताया कि यह स्थान आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा है और यहां भक्त बड़ी श्रद्धा से आते हैं. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म अपनाना उनका व्यक्तिगत निर्णय है और वे अपने नए जीवन की शुरुआत लेकर उत्साहित हैं.

एक दिन पहले 500 किन्नरों ने की ‘घर वापसी'

महाशिवरात्रि के अवसर पर भोपाल में भी किन्नर अखाड़ा द्वारा एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें करीब 500 किन्नरों ने एक साथ सनातन धर्म अपनाने की घोषणा की. देशभर से आए किन्नरों ने आध्यात्मिक जीवन की ओर कदम बढ़ाया और अपनी ‘घर वापसी' का ऐलान किया. इस आयोजन में शंकराचार्य नियुक्ति, महामंडलेश्वर चयन और कई धार्मिक घोषणाएं भी की गईं.

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किन्नर अखाड़ा के नेतृत्व में हुआ भव्य आयोजन

भोपाल में हुए कार्यक्रम का नेतृत्व किन्नर अखाड़ा के संस्थापक ऋषि अजय दास ने किया. देश के कई राज्यों से आए किन्नर इस आयोजन का हिस्सा बने. समारोह में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ किन्नर समुदाय के लिए नए पद, जिम्मेदारियां और आध्यात्मिक भूमिकाएं तय की गईं.

शंकराचार्य, महामंडलेश्वर और जगतगुरु पद की घोषणाएं

कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की गईं. हिमांशु सखी को पुष्कर पीठ का शंकराचार्य घोषित किया गया. हेमांगी सखी को महामंडलेश्वर और किन्नर भागवत कथा वाचक के रूप में शंकराचार्य पद प्रदान किया गया. इसके अलावा काजल ठाकुर और संजना को जगतगुरु का पद, जबकि रानी ठाकुर को महामंडलेश्वर की जिम्मेदारी सौंपी गई.

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