Kinnar Akhada Event Bhopal: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भोपाल में एक अनोखा आयोजन देखने को मिला, जहां करीब 500 किन्नरों ने सनातन धर्म अपनाकर “घर वापसी” की घोषणा की. किन्नर अखाड़ा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश के कई राज्यों से आए किन्नरों ने आध्यात्मिक जीवन की नई शुरुआत की. कार्यक्रम में शंकराचार्य नियुक्ति, महामंडलेश्वर चयन और किन्नर समाज से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं.
किन्नर अखाड़ा ने भोपाल में किया आयोजन
यह कार्यक्रम किन्नर अखाड़ा के तत्वावधान में भोपाल में आयोजित किया गया. आयोजन का नेतृत्व किन्नर अखाड़ा संस्थापक ऋषि अजय दास ने किया. देशभर से सैकड़ों किन्नर इस कार्यक्रम में शामिल हुए और सनातन धर्म को अपनाते हुए स्वतः को इस संस्कृति से जुड़ा घोषित किया.
शंकराचार्य नियुक्ति और नए पदाधिकारियों का चयन
कार्यक्रम के दौरान ऋषि अजय दास ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन अर्धनारीश्वर स्वरूप के भाव के साथ हिमांशु सखी को पुष्कर पीठ का शंकराचार्य घोषित किया गया. इसके साथ‑साथ हेमांगी सखी को महामंडलेश्वर और किन्नर भागवत कथा वाचक के रूप में शंकराचार्य पद प्रदान किया गया. काजल ठाकुर और संजना को जगतगुरु का पद दिया गया. रानी ठाकुर को महामंडलेश्वर बनाया गया. यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में किन्नर समाज के लोगों को धार्मिक पद प्रदान किए गए.
शास्त्रार्थ की चुनौती और आध्यात्मिक प्रशिक्षण का दावा
महामंडलेश्वर हेमांगी सखी ने मंच से सभी शंकराचार्यों को शास्त्रार्थ की खुली चुनौती दी. उन्होंने कहा कि उन्होंने वृंदावन में रहकर लंबे समय तक शास्त्रों का अध्ययन किया है और धर्मग्रंथों की गहन समझ रखती हैं. उन्होंने कहा कि किन्नर समाज को अब वह स्थान मिलना चाहिए, जिसके वे सदियों से इच्छुक थे.
किन्नर समाज को मिली पहचान- ऋषि अजय दास
ऋषि अजय दास ने कहा कि किन्नर समाज को हमेशा मनुष्य योनि में जन्म लेने पर प्रश्न उठाए जाते रहे, लेकिन अब उनकी पहचान स्पष्ट रूप से सामने आ रही है. उन्होंने कहा कि “हजारों वर्षों से किन्नर समाज पीड़ा में था. धर्म परिवर्तन, टेरर फंडिंग जैसी घटनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंता थीं. अब जब किन्नर समाज बड़ी संख्या में धर्म अपनाकर लौट रहा है, यह बदलाव शुभ संकेत है.
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा किन्नर समाज के लिए 12 योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे समुदाय को समाज और शासन में सम्मानजनक स्थान मिल रहा है.
सैकड़ों किन्नरों की ‘घर वापसी'
कार्यक्रम में देश के अलग‑अलग राज्यों से पहुंचे किन्नरों ने विधि‑विधान से सनातन धर्म स्वीकार किया. आयोजकों ने बताया कि कुल मिलाकर लगभग 500 किन्नरों ने “घर वापसी” की. किन्नर अखाड़ा का दावा है कि आने वाले समय में और भी किन्नर समाज से लोग इस पहल से जुड़ेंगे.
कार्यक्रम का संदेश- नई शुरुआत, नई पहचान
महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम किन्नर समाज के लिए एक नई आध्यात्मिक और सामाजिक यात्रा की शुरुआत माना जा रहा है. आयोजकों ने कहा कि धर्म सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि सम्मान और अस्तित्व का आधार है और किन्नर समाज इस बदलाव को नई उम्मीद के रूप में देख रहा है.