MP: भारी गड़बड़ी! फर्जी नोटशीट से लाखों रुपयों का भुगतान, 10 साल बाद EOW ने दर्ज किया मामला 

MP News: मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक बड़ी खबर है. यहां फर्जी नोटशीट से लाखों रुपयों के भुगतान के मामले में 10 सालों के बाद EOW ने मामला दर्ज किया है.  

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Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के जबलपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर कचरा परिवहन में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं. फर्जी नोटशीट बनाकर एक सहकारी समिति को लाखों रुपये का गलत भुगतान किया गया. शिकायत के आधार पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने मामले की जांच शुरू कर अपराध पंजीबद्ध किया है.

कैसे हुई गड़बड़ी?

बताया जा रहा है कि वार्ड क्रमांक 8 में कचरा परिवहन के लिए नगर निगम द्वारा 14,70,228 रुपये का बिल प्रस्तुत किया गया था. नोटशीट पर 6,04,495 रुपये के भुगतान की अनुशंसा की गई थी. लेकिन आरोपियों ने टाइप की हुई एक फर्जी नोटशीट बनाकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस सफाई कामगार सहकारी समिति,रानीताल को 13,17,510 रुपये का भुगतान करवा दिया.

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फर्जी हस्ताक्षरों का खुलासा

ईओडब्ल्यू के मंजीत सिंह के नेतृत्व में जांच के दौरान फर्जी नोटशीट में के.के. दुबे के हस्ताक्षरों का परीक्षण भोपाल के राज्य परीक्षक से करवाया गया. जांच में यह हस्ताक्षर फर्जी पाए गए. इसके बाद स्वास्थ्य अधिकारी विनोद श्रीवास्तव, सहायक स्वास्थ्य अधिकारी अनिल जैन और सफाई कामगार सहकारी समिति के अध्यक्ष हेमंत करसा पर 8,20,233 रुपये का अतिरिक्त भुगतान कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया.

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10 साल बाद दर्ज हुआ मामला

 इस मामले को दर्ज करने में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को दस साल लग गए. इस बीच आरोपी विनोद श्रीवास्तव और अनिल जैन सेवानिवृत्त हो चुके हैं. सहकारी समिति के अध्यक्ष हेमंत करसा को भी आरोपी बनाया गया है. इस मामले के बाद हड़कंप मच गया है. 

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