रोबोट मूवी से प्रभावित होकर MP के इस बच्चे ने सेना के लिए बना दी आटोमेटिक फायर गन और स्मार्ट चश्मा

अमन ने बताया कि 2009 में बनी रोबोट फिल्म देखकर मैंने भी रोबोट बनाने का निश्चय किया. मोबाइल पर ही रोबोट बनाने के लिए गूगल (Google) पर अलग-अलग साइट्स पर जाकर सर्च कर सीखा. मुंबई की रोबोट बनाने वाली कंपनी के डायरेक्टर संतोष आठवले जी से मैंने रोबोट बनाने के सपने को साझा किया, उनसे कुछ टिप्स लिए.

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Inspiring Story: कहते हैं कि अगर शिद्दत के साथ किसी काम को किया जाए तो कायनात भी उस काम को पूरा होने से नहीं रोक सकती है. ऐसे ही गरीबी के हालात में अपने सपनों को पूरा करने की जिद में लगे 20 वर्षीय युवक ने 2009 में बनी रोबोट फिल्म (Robot Movie) देखकर रोबोट बनाने (Robot Making) का सपना संजोकर उसे पूरा करने के लिए पूरी लगन और शिद्दत से जुट गया. इस युवा के पिता ढाबे पर काम करते हैं और उन्हीं की आमदनी से घर चलता है. सपना पूरा करने के लिए कचरा, कबाड़े का सामान इकट्ठा कर लकड़ी और गत्तो से रोबोट का स्ट्रक्चर बनाया. ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक सामान बुलाया और रोबोट बनाने वाली कंपनी के डायरेक्टर से संपर्क कर उनसे कुछ टिप्स लिए और बना दिया मोबाइल से ऑपरेट होने वाला रोबोट.

अमन कालरा अपने रोबोट के साथ

आठवीं तक पढ़े हैं अमन, इंटरनेट से जानकारी जुटाकर कर दिया कमाल

ये कहानी मध्यप्रदेश के खरगोन जिले की सनावद तहसील के ग्राम बासवा में रहने वाले अमन कालरा की है. अमन कालरा ग्रामीण क्षेत्र का वह प्रतिभावान युवा हैं, जिन्होंने कचरे में से कुछ सामग्री लेकर रोबोट बना दिया. कक्षा आठवीं तक पढ़ाई करने वाले अमन कालरा बताते हैं कि हमारा परिवार हरियाणा का रहने वाला है, पिताजी का दादाजी से फौज में जाने को लेकर विवाद हो गया और हम हरियाणा छोड़कर मध्य प्रदेश आ गए. मैं आठवीं कक्षा मानपुर के स्कूल मे उत्तीर्ण की है. पिताजी ढाबे पर खाना बनाने का कार्य करते हैं. गरीबी के चलते मेनै पढ़ाई छोड़ दी पिछले 6 वर्षों से ग्राम बासवा में ही रह रहे हैं.

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अमन ने बताया कि 2009 में बनी रोबोट फिल्म देखकर मैंने भी रोबोट बनाने का निश्चय किया. मोबाइल पर ही रोबोट बनाने के लिए गूगल (Google) पर अलग-अलग साइट्स पर जाकर सर्च कर सीखा. मुंबई की रोबोट बनाने वाली कंपनी के डायरेक्टर संतोष आठवले जी से मैंने रोबोट बनाने के सपने को साझा किया, उनसे कुछ टिप्स लिए. उन्हीं के बताएं टिप्स के अनुसार ऑनलाइन सामान बुलाया और रोबोट बना दिया.

अमन कालरा अपनी गन के साथ

रोबोट की विशेषताएं ये रहीं

अमन बताते हैं कि रोबोट में अल्ट्रासोनिक सिस्टम (Ultrasonic System) लगा है, जिसको मैं मोबाइल से ऑपरेट करता हूं. इसके बाद मैंने सेंसर वाला रोबोट भी बनाया जो की ऑटोमेटिक है. कोरोना (COVID-19) के समय हॉस्पिटल्स में मरीजों की तादाद ज्यादा होने के कारण डॉक्टरों की बहुत परेशानी होती थी, उसी को ध्यान में रखकर मैंने हॉस्पिटल में सेवाएं देने के लिए ट्रे वाला रोबोट भी बनाया जो मरीजो को दवाई और सामग्री सर्व करता है.

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अमन कहते हैं कि मैंने फौजी भाइयों के लिए ऑटोमेटिक फायर गन भी बनाई है. इस फायर गन में अल्ट्रासोनिक सेंसर लगा हुआ है, जब भी इस गन के सामने कोई आएगा गन कुछ सेकंड में चल जाएगी. इसी तरह ब्लाइंड लोगों के लिए स्मार्ट चश्मा (Smart Glasses) बनाया है, इस चश्मे में सेंसर लगा है, जो पहनने वाले को बीप की आवाज से सचेत करता है.

अमन ने बताया कि इसमें शासन की ओर से कोई अनुदान नहीं मिला है. अमन कालरा का देश के प्रति कुछ कर गुजरने का जो जज्बा है, उसके जरिए वह अपने हम उम्र युवाओं को संदेश देते हुए कहते हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती जैसा मैंने किया है, आप भी कर सकते हैं. आप अपने देश की तरफ देखोगे, अपने तिरंगे की तरफ देखोगे तो आपका खून खौल उठेगा और तब आप यह सब कर पाओगे.

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