इंदौर की जिला अदालत ने एक बेहद सनसनीखेज हत्या मामले में पूर्व बैंक प्रबंधक को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने पाया कि आरोपी ने अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद अपराध छिपाने के लिए शव को कोबरा सांप से डसवाया था ताकि मौत को प्राकृतिक घटना या सर्पदंश के रूप में दिखाया जा सके. करीब सात साल पुराने इस मामले में अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना. मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, पुलिस जांच और गवाहों के बयानों ने हत्या की कहानी उजागर कर दी. अदालत ने आरोपी को हत्या, सबूत मिटाने और संरक्षित वन्यजीव की हत्या से जुड़े मामलों में दोषी ठहराते हुए सख्त सजा सुनाई.
अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा
इंदौर की अतिरिक्त सत्र अदालत ने अमितेश पटेरिया उर्फ शालू (43) को अपनी पत्नी शिवानी की हत्या का दोषी पाया. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेमंत कुमार रघुवंशी ने 24 जून को दिए फैसले में आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), धारा 201 (सबूत मिटाना) और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 51 के तहत दोषी ठहराया. अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा के साथ 45 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.
1 दिसंबर 2019 की घटना
अभियोजन के अनुसार घटना 1 दिसंबर 2019 की है. आरोप था कि अमितेश पटेरिया ने अपनी पत्नी शिवानी का तकिये से मुंह दबाकर दम घोंट दिया. हत्या के बाद उसने मामले को सर्पदंश से हुई मौत साबित करने की कोशिश की. इसके लिए कथित रूप से शव को कोबरा सांप से डसवाया गया ताकि जांच एजेंसियां मौत की असली वजह तक न पहुंच सकें.
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खोला राज
मामले की जांच के दौरान पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट निर्णायक साबित हुई. रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि शिवानी की मौत सांप के काटने से नहीं, बल्कि मुंह दबाए जाने के कारण दम घुटने से हुई थी. मेडिकल बोर्ड की इस रिपोर्ट ने हत्या और सर्पदंश की कहानी के बीच का अंतर साफ कर दिया. इसके बाद पुलिस जांच हत्या की दिशा में आगे बढ़ी.
घटनास्थल से मिला था मरा हुआ कोबरा
अभियोजन पक्ष के अनुसार पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची तो उसे बिस्तर, तकिये के कवर और अन्य सामान के साथ एक मरा हुआ कोबरा सांप भी मिला. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने अपराध छिपाने की कोशिश के बाद कोबरा को भी मार दिया था. यही वजह है कि उस पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई.
सपेरे से खरीदा था कोबरा
मामले के एक जांच अधिकारी ने अदालत में दिए बयान में बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने कबूल किया था कि उसने राजस्थान के अलवर रेलवे स्टेशन पर एक सपेरे से 5 हजार रुपये में कोबरा खरीदा था. जांच एजेंसियों ने इस पहलू को भी केस का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया.
28 गवाहों ने मजबूत किया अभियोजन पक्ष
अपर लोक अभियोजक चंद्रशेखर चौधरी के अनुसार अदालत में अभियोजन पक्ष ने कुल 28 गवाह पेश किए. इनमें पुलिस अधिकारी, पोस्टमॉर्टम बोर्ड के सदस्य, पशु चिकित्सक और अन्य संबंधित गवाह शामिल थे. वैज्ञानिक तथ्यों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने आरोपी के खिलाफ केस को मजबूत बनाया.
वैवाहिक तनाव भी आया सामने
सुनवाई के दौरान मृतका शिवानी के मायके पक्ष के लोगों ने भी बयान दर्ज कराए. उन्होंने पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे वैवाहिक तनाव और पारिवारिक मतभेदों का उल्लेख किया. अभियोजन पक्ष ने इन्हें हत्या की संभावित पृष्ठभूमि के रूप में अदालत के सामने रखा.
सात साल बाद मिला न्याय
करीब सात साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया. इंदौर के इस चर्चित मामले में फैसला आने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है, क्योंकि हत्या के बाद सर्पदंश का भ्रम पैदा करने की कथित कोशिश ने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया था.
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