Indore Sarafa Chaupati: मध्य प्रदेश का इंदौर सफाई और खाने के लिए दुनिया भर में फेमस है. इंदौर में ऐतिहासिक सराफा बाजार में लगने वाली 'रात की चौपाटी' भी लोगों को काफी आकर्षित करती है, लेकिन इन दिनों सराफा चौपाटी विवादों के घेरे में है. नगर निगम पर आरोप है कि परंपरा को बचाने के नाम पर बाजार का स्वरूप ही बिगाड़ दिया है और सुरक्षा से लेकर पारदर्शिता तक कई सवाल खड़े हो गए हैं. नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने इसे “बारूद के ढेर पर बैठा सराफा” बताते हुए गंभीर आपत्तियां जताई हैं.
ऐतिहासिक धरोहर से खिलवाड़ का आरोप
चिंटू चौकसे का कहना है कि सराफा बाजार इंदौर की पहचान है, लेकिन नगर निगम ने इसके मूल स्वरूप के साथ खिलवाड़ किया है. उनके मुताबिक चौपाटी में सिर्फ पुरानी और पारंपरिक व्यंजन दुकानों को ही अनुमति दी जानी चाहिए थी, लेकिन मौजूदा व्यवस्था ने इस परंपरा को मजाक बना दिया है.
परंपरा के नाम पर पक्षपात का दावा
चौकसे ने आरोप लगाया कि चौपाटी को परंपरागत स्वरूप में लाने की बात कही गई, लेकिन व्यवहार में भाई-भतीजावाद किया गया. कई भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों को “पुरातन दुकान संचालक” बताकर सूची में जोड़ दिया गया. जबकि सराफा में हमेशा मिठाई और व्यंजन की दुकानों की ही परंपरा रही है, जिनमें गैस चूल्हे की आवश्यकता नहीं होती थी.
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दुकानों की संख्या पर उठे सवाल
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार पहले निगम ने 40 दुकानों की अनुमति की बात कही थी, लेकिन बाद में यह संख्या अचानक 60 कर दी गई. चौकसे का आरोप है कि नगर निगम लगातार दुकानें बढ़ाकर पूरे बाजार को अव्यवस्थित कर रहा है और इस तरह सुरक्षा जोखिम भी बढ़ रहा है.
परंपरा से हटकर दी गई नई दुकानें
चौकसे का कहना है कि निगम ने पुरातन दुकान के नाम पर पाव भाजी, सैंडविच, पिज्जा, बर्गर और वन-शॉट ड्रिंक जैसी दुकानों को अनुमति दे दी, जो न तो मालवा का व्यंजन हैं और न ही कभी सराफा में लगती थीं. ये निर्णय चौपाटी के स्वरूप को बदल रहे हैं और लोगों में नाराजगी का कारण बन रहे हैं.
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गैस चूल्हों से बढ़ रहा है खतरा
उन्होंने साफ कहा कि नई दुकानों में लगने वाले गैस चूल्हे सराफा बाजार को सचमुच “खतरे के ढेर” पर बैठा रहे हैं. इतनी भीड़ वाले बाजार में आग की छोटी सी चूक भी बड़ा हादसा बन सकती है, इसलिए गैर-जरूरी दुकानों की अनुमति तुरंत निरस्त की जानी चाहिए.