Peacock Death: इंदौर में हीट स्ट्रोक का कहर, 35 राष्ट्रीय पक्षी की मौत पर मचा हड़कंप, जांच में जुटी टीम

MP News: इंदौर में कलिंदी क्षेत्र और रालामंडल में मोर की मौत से  हड़कंप मच गया है.चिड़ियाघर के पीछे मोर मृत मिले हैं. 

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Peacock died heat stroke: मध्य प्रदेश के इंदौर में गर्मी अपने पूरे जोर पर है, जहां मनुष्य इस गर्मी से परेशान है तो वहीं अब जानवर हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के कारण अपना दम तोड़ रहे हैं. इंदौर में 35 मोर की मृत्यु की बात सामने आने के बाद हर तरफ हड़कंप मच गया था. रालामंडल में भी 20 मोर की मौत दर्ज की गई है. 

हालांकि डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने NDTV से बातचीत में बताया कि अभी तक ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है. ऑन रिकॉर्ड 4 मोर की मौत जू में दर्ज की गई.

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35 मोर की मौत पर डीएफओ ने की बात

इंदौर के चिड़ियाघर प्रभारी उत्तम मिश्रा से मोर की मौत पर चर्चा की गई. जिसमें उन्होंने बताया कि कुछ लोग चार मोर को रेस्क्यू करने के दृष्टिकोण से उनके पास लाए थे. जिनमें से तीन मोर पहले ही मर चुके थे. वहीं एक मरणासन्न की स्थिति में था. डॉक्टर द्वारा उसे बचाने का प्रयास किया गया. हालांकि उसकी स्थिति काफी गंभीर थी इसलिए उसे बचा नहीं पाए.

पोस्टमार्टम के बाद डॉक्टर ने मृत्यु का मुख्य कारण विगत दो सप्ताह के अंदर शहर में गर्मी के माहौल में बढ़ोतरी बताया. तापमान अचानक बढ़ने से वन्य प्राणियों में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ने लगा है और डिहाईड्रेशन भी जानवरों में देखने को मिला है.

डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि अचानक तापमान बढ़ने से पशुओं को उनके बायोलॉजिकल सिस्टम के अनुकूल होने में समय लगता है. जरूरत पड़ने पर पोस्टमार्टम का सैंपल लैब में भेजा जाएगा और इस बात का अध्ययन करेंगे की असल में मौत का मुख्य कारण क्या रहा.

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मोर के विचरण क्षेत्र को चिन्हित किया जाएगा

प्रबंधन की दृष्टिकोण से बात की जाए तो मार्च के अंत से ही सभी स्टाफ को निर्देशित किया गया था कि जंगलों में जाकर पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की जाए. इस साल ज्यादा गर्मी की आशंका होने से हमारी टीम पहले ही तैयारी कर ली गई है. ऐसे क्षेत्र जो शहरी क्षेत्र में आते हैं और अगर वहां पर मोरों का विचरण है तो उन्हें चिन्हित किया जाकर वहां सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी.

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आधिकारिक बयान सामने नहीं आया

कई जगह यह बात की जा रही है कि 35 से ज्यादा मोर की मृत्यु हुई है, इस पर फील्ड स्टाफ की तरफ से किसी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल जो घटनाक्रम सामने आया है वह 4 मोर तक सीमित है. संभावना हो सकती है कि अन्य स्थानों पर ऐसी कोई घटना हुई हो, वन विभाग द्वारा जिसकी जानकारी लगातार ली जा रही है.

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