नो एंट्री के बावजूद हाथी कैसे आई? इंदौर में रिक्शा चालक की मौत के बाद महावत और मालिक पर केस, वन विभाग का एक्शन

राजनगर में हथिनी के हमले से ऑटो चालक की मौत के बाद वन विभाग ने महावत और मालिक के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है. जांच में इंदौर प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने की बात सामने आई.

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इंदौर हाथी कांड में वन विभाग का बड़ा एक्शन, महावत और मालिक पर दर्ज होगा मामला

इंदौर में हथिनी के हमले में ऑटो-रिक्शा चालक की मौत के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महावत और हथिनी के मालिक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हथिनी को इंदौर जिले में लाने के लिए वन विभाग से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी. यही नहीं, दस्तावेजों की जांच में यह भी पता चला कि हथिनी का पंजीयन और लाइसेंस अन्य स्थान से संबंधित है, जबकि उसके इंदौर प्रवेश की वैध स्वीकृति उपलब्ध नहीं थी. 26 जुलाई को राजनगर क्षेत्र में हुए हादसे में एक ऑटो चालक की जान चली गई थी. घटना के बाद अब हाथी की एंट्री, परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

रिक्शा चालक की मौत के बाद तेज हुई जांच

26 जुलाई को इंदौर के राजनगर क्षेत्र में 49 वर्षीय ऑटो-रिक्शा चालक विजय होलकर एक हथिनी को गुड़ खिलाने पहुंचे थे. इसी दौरान हथिनी ने उन्हें सूंड से पटक दिया और फिर कुचल दिया. गंभीर रूप से घायल विजय होलकर को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. घटना के बाद पुलिस और वन विभाग दोनों ने मामले की जांच शुरू की. जांच में हथिनी के इंदौर आने और उसकी वैध अनुमति को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए.

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वन विभाग ने जारी किया नोटिस

वन विभाग ने हथिनी के महावत उमेश गोस्वामी और मालिक संदीप निर्मोही को नोटिस जारी कर दस्तावेज पेश करने को कहा था. जांच में पता चला कि हथिनी का पंजीयन उज्जैन के निर्मोही अखाड़ा से जुड़ा है और लाइसेंस संदीप निर्मोही के नाम पर जारी है. अधिकारियों के अनुसार हथिनी हैदराबाद में फिल्म शूटिंग और धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वापस लौट रही थी.

इंदौर आने की अनुमति नहीं मिली थी

वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) लाल सुधाकर सिंह ने बताया कि 26 वर्षीय हथिनी वन विभाग में पंजीकृत है, लेकिन उसे इंदौर जिले की सीमा में लाने के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी. पूछताछ में महावत ने बताया कि हथिनी को तेलंगाना से ट्रक के जरिए उज्जैन ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ट्रक खराब हो गया. इसके बाद हथिनी को पैदल इंदौर लाया गया. इस दौरान वन विभाग से कोई वैध अनुमति प्राप्त नहीं की गई थी.

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज

वन विभाग ने महावत उमेश गोस्वामी और मालिक संदीप निर्मोही के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 48ए सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. धारा 48ए वन्यजीवों के बिना अनुमति परिवहन से संबंधित है. अधिकारियों का कहना है कि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई है और कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.

CCTV फुटेज में दिखे हथिनी के संकेत

डीएफओ के अनुसार घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज की जांच में यह दिखाई दिया कि हथिनी बार-बार अपनी सूंड हिलाकर ऑटो चालक को दूर रहने का संकेत दे रही थी. उन्होंने कहा कि यदि पशुओं के व्यवहार और संकेतों को समय रहते समझ लिया जाए तो कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है. हालांकि विभाग का मानना है कि आवश्यक अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता तो ऐसी घटना से बचा जा सकता था.

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पुलिस पहले ही दर्ज कर चुकी है FIR

वन विभाग की कार्रवाई से पहले पुलिस महावत उमेश गोस्वामी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) (लापरवाही से मृत्यु) और धारा 291 (पशु के संबंध में लापरवाहीपूर्ण आचरण) के तहत एफआईआर दर्ज कर चुकी है. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि हथिनी को आबादी वाले इलाके में लाने के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं.

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