Bhojshala : भोजशाला विवाद में ASI सर्वे रिपोर्ट पर आज होगी सुनवाई,सभी पक्ष आपत्तियां, सुझाव और सिफारिशें करा सकेंगे दर्ज

Historical Monuments Dispute: सर्वेक्षण रिपोर्ट से जुड़ी आपत्तियों के अलावा, पीठ भोजशाला मामले से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं पर भी विचार कर सकती है. तीन अलग-अलग मुस्लिम संगठनों ने याचिकाएं दायर करके मौजूदा याचिकाओं में खुद को भी एक पक्ष के तौर पर शामिल करने की गुजारिश की है. सुनवाई के दौरान इन याचिकाओं पर भी विचार किए जाने की संभावना है.

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Bhojshala-kamal Maula Mosque Dispute: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh Highcourt) की इंदौर (Indore) पीठ में सोमवार को लंबे समय से चले आ रहे भोजशाला विवाद पर आज एक अहम सुनवाई है. ये पूरी मामला कमाल मौला मस्जिद और भोजशाला की ऐतिहासिक इमारत से जुड़ा है, जो फिलहाल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण में है. अदालत ने इससे पहले एएसआई को निर्देश दिया था कि वह आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करके पूरे परिसर का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण करें.

यह सर्वेक्षण लगभग 98 दिनों तक चला. इसके बाद एएसआई ने अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत में एक सीलबंद लिफाफे में जमा की थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, इस रिपोर्ट की प्रतियां मामले से जुड़े सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गई थी.

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मुस्लिम पक्ष ने दर्ज कराई थी आपत्ति

इस मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की थी, ताकि सभी पक्ष एएसआई की रिपोर्ट में कही गई बातों पर अपनी आपत्तियां, सुझाव और सिफारिशें दर्ज करा सकें. इन विशिष्ट आपत्तियों पर सुनवाई उसी दिन शुरू होने वाली है. खबरों के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष ने सर्वेक्षण दस्तावेज में बताए गए कई अहम बिंदुओं पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं. ये आपत्तियां दूसरे पक्षों के साथ भी साझा कर दी गई हैं. अब अदालत सुनवाई के दौरान इन बिंदुओं की विस्तार से जांच करेगी.

इन याचिकाओं पर भी होगी सुनवाई

सर्वेक्षण रिपोर्ट से जुड़ी आपत्तियों के अलावा, पीठ भोजशाला मामले से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं पर भी विचार कर सकती है. तीन अलग-अलग मुस्लिम संगठनों ने याचिकाएं दायर करके मौजूदा याचिकाओं में खुद को भी एक पक्ष के तौर पर शामिल करने की गुजारिश की है. सुनवाई के दौरान इन याचिकाओं पर भी विचार किए जाने की संभावना है. इस मामले में कई संबंधित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो रही है. इनमें 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' द्वारा दायर मुख्य याचिका भी शामिल हैं, जिसमें इस स्थल के धार्मिक स्वरूप को लेकर घोषणा किए जाने की मांग की गई है. इसके अलावा, 'कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी' ने भी एक अलग याचिका दायर की है.

ये है पूरा विवाद

यह विवाद इसी स्थल को लेकर है, जिसे हिंदू समुदाय "मां वाग्देवी सरस्वती" का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे 'कमाल मौला मस्जिद' के रूप में पहचानता है. फिलहाल, अदालत के पहले के एक आदेश के अनुसार, हिंदुओं को मंगलवार के दिन यहां पूजा-अर्चना करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिम समुदाय शुक्रवार को यहां नमाज अदा करता है.

सुरक्षा के हैं सख्त इंतजाम

एएसआई को यह सर्वेक्षण करने का आदेश इसलिए दिया गया था, ताकि वह बिना किसी छेड़छाड़ वाली वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करके इस ऐतिहासिक स्मारक से जुड़े ऐतिहासिक और ढांचागत विवरणों का पता लगा सके. धार के स्थानीय प्रशासन ने अदालत की सुनवाई के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम कर लिए हैं.

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दोनों ही समुदाय इस मामले से जुड़े घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इस मामले का जो भी नतीजा निकलेगा, उसका असर इस संवेदनशील मुद्दे के समाधान पर पड़ सकता है, एक ऐसा मुद्दा जो पिछले कई सालों से चला आ रहा है.

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