IAS Santosh Verma: मध्य प्रदेश कैडर के विवादित IAS अधिकारी संतोष वर्मा के समर्थन में शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए. उनके खिलाफ हुई सरकारी कार्रवाई के विरोध में बड़वानी में SC, ST और OBC समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों ने संयुक्त प्रदर्शन किया.
प्रदर्शनकारी बड़वानी के पुराने कलेक्टर कार्यालय परिसर में एकत्रित हुए और रैली निकालते हुए कारंजा चौराहे पहुंचे. यहां नायब तहसीलदार बाबूसिंह निनामा को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया.
इस आंदोलन में अजाकस, ओबीसी संगठन, जयस, सर्व दलित एकता मंच और आदिवासी समाज संघ सहित कई सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए. सभा के दौरान वक्ताओं ने मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार पर आदिवासी और वंचित वर्गों के अधिकारियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया.
अजाकस जिला अध्यक्ष सुनील बागुले ने कहा कि एक ईमानदार आदिवासी अधिकारी को साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा है. यह कार्रवाई वंचित वर्गों की आवाज दबाने और समाज में डर का माहौल बनाने की कोशिश है.
वक्ताओं ने दावा किया कि 23 नवंबर 2025 को भोपाल में हुए AJAKS के प्रांतीय अधिवेशन में संतोष वर्मा द्वारा सामाजिक समरसता, जाति उन्मूलन, हिंदू एकता और संविधान की सर्वोच्चता पर दिए गए विचारों को तोड़-मरोड़कर कुछ सेकंड की वीडियो क्लिप के रूप में वायरल किया गया. बिना निष्पक्ष जांच के नोटिस जारी करना आदिवासी सम्मान पर हमला है.
एडवोकेट सुमेर बडोले ने कहा कि संतोष वर्मा द्वारा स्पष्टीकरण देने और खेद जताने के बावजूद उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई, जो संविधान और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है.
प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों लोगों ने “संतोष वर्मा को न्याय दो”, “आदिवासी अधिकारी पर अत्याचार बंद करो” और “मनुवादी सोच नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए. संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा.
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में IAS संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई तत्काल वापस लेना, निष्पक्ष जांच समिति का गठन, वीडियो क्लिप वायरल करने वालों पर FIR दर्ज करना, आदिवासी अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, OBC-SC-ST वर्गों को समान अवसर देना और जातिगत भेदभाव के खिलाफ सख्त कानून बनाना शामिल है.
IAS संतोष वर्मा मामला क्या है?
मध्य प्रदेश सरकार ने IAS अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए केंद्र सरकार को उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव भेजा है. यह कार्रवाई विभिन्न संगठनों द्वारा उनके कथित आचरण को लेकर की गई शिकायतों और ज्ञापनों के आधार पर की गई है.
संतोष वर्मा वर्ष 2020 में प्रमोट होकर मध्य प्रदेश कैडर में IAS बने थे. उस समय उन पर एक आपराधिक मामला लंबित था, जिसके चलते उनकी पदोन्नति रोकी गई थी. आरोप है कि उन्होंने पदोन्नति के लिए कोर्ट का फर्जी आदेश प्रस्तुत किया, जिसमें खुद को बेगुनाह बताया गया था.
इसके अलावा 23 नवंबर 2025 को भोपाल में AJAKS के प्रांतीय अधिवेशन के दौरान दिए गए उनके कथित बयान को लेकर विवाद खड़ा हुआ. आरोप है कि उन्होंने कहा था, “एक परिवार में सिर्फ एक व्यक्ति को ही रिजर्वेशन मिलना चाहिए, जब तक कि कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान न कर दे या रिश्ता न बना ले.” इसी बयान को लेकर सरकार और संगठनों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है.
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