रात की चौपाल से स्कूल की क्लास तक... जहां पोस्टिंग वहां किया कमाल, CM मोहन भी इनके कायल, जानिए इस IAS अधिकारी की अनोखी कहानी

Sagar Collector IAS Officer Sandeep G R: छतरपुर, सतना से लेकर सागर तक... जहां भी जिम्मेदारी मिली वहां इस IAS अधिकारी ने विकास की नई मिसाल पेश की. इन कार्यों को देखते हुए मध्य प्रदेश शासन में उन्हें अपर सचिव के पद पर पदोन्नत किया गया है. ऐसे में जानते हैं इस IAS अधिकारी की प्रेरणादायक कहानी.

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IAS Officer Sandeep G R: मध्य प्रदेश के एक IAS अधिकारी (IAS officer) इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं. वो आए दिन अपनी कार्यशैली और नवाचारों के लिए सुर्खियों में रहते हैं. इतना ही नहीं इस IAS अधिकारी के कार्यशैली के दीवाने सीएम मोहन यादव भी हैं... हालांकि इस बार पदोन्नति की वजह से वो चर्चाओं में हैं. आज हम बात कर रहे हैं IAS अधिकारी व सागर कलेक्टर संदीप जी.आर. के बारे में...उन्हें मध्य प्रदेश शासन में अपर सचिव के पद पर पदोन्नत किया गया  है.  दरअसल, उत्कृष्ट कार्यशैली, नवाचारों और जनहितकारी कार्यों को देखते हुए सरकार ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.

छतरपुर, सतना से लेकर सागर तक... जहां भी जिम्मेदारी मिली वहां IAS अधिकारी संदीप जी.आर. ने विकास की नई मिसाल पेश की. कभी इंजीनियर रहे IAS संदीप जी.आर. ने नौकरी छोड़कर UPSC की कठिन राह चुनी और 2013 में सफलता हासिल कर IAS बने. 

गांवों में रात की चौपाल से लेकर स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने तक, उनकी कहानी पूरे मध्य प्रदेश में प्रेरणा बन चुकी है. आज हम बताएंगे सागर के कलेक्टर और IAS अधिकारी संदीप जी.आर. की अनोखी और इंस्पायरिंग जर्नी....

तैयार की भरोसे की मजबूत कड़ी

संदीप जी.आर. 2013 बैच के IAS अधिकारी हैं. उन्होंने बुंदेलखंड में प्रशासन की कार्यसंस्कृति को नई दिशा देने वाले अधिकारियों में गिने जाते हैं. वर्तमान में सागर कलेक्टर के रूप में पदस्थ रहते हुए उन्होंने प्रशासन और आमजन के बीच भरोसे की मजबूत कड़ी तैयार की.

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इंजीनियरिंग के बाद चुनी UPSC की कठिन राह

कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाले IAS अधिकारी संदीप जी.आर. का जन्म 14 दिसंबर 1983 को बेंगलुरु में हुआ... उन्होंने इंजीनियरिंग (BE) की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने UPSC की कठिन राह चुनी. उनका स्पष्ट मानना है कि सरकारी योजनाओं की सार्थकता तभी है, जब वो कागजों से निकलकर जमीन पर प्रभावी रूप से लागू होगा...

प्रशासनिक अनुभव से सजी कार्यशैली

सागर से पहले वो छतरपुर कलेक्टर के पद पर रहे... हालांकि वो सतना नगर निगम आयुक्त और जिला पंचायत CEO के रूप में भी कार्य कर चुके हैं. हर पद पर उन्होंने अनुशासन, पारदर्शिता और नवाचार की मिसाल कायम की.

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रात की चौपाल से स्कूल की क्लास तक

संदीप जी.आर. की कार्यशैली उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग बनाती है. गांवों में रात की चौपाल, स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना, मध्यान्ह भोजन में शामिल होकर व्यवस्थाओं की समीक्षा...ये सब उनके प्रशासनिक कामकाज का हिस्सा रहा है. इसी वजह से वो आमजन से सीधे जुड़े... और जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई.

‘श्रद्धांजलि योजना' बनी मिसाल

सागर में उनकी सबसे चर्चित पहल “श्रद्धांजलि योजना” रही... इस योजना के तहत दिवंगत सरकारी कर्मचारियों के परिजनों को बिना देरी और अनावश्यक कागजी प्रक्रिया के त्वरित अनुकंपा नियुक्ति दी... इस योजना की सराहना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी की है... इसे अन्य जिलों में लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

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कृषि, पर्यावरण और भविष्य पर फोकस

किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना में तेज़ी, फसल अवशेष जलाने पर सख्ती और कृषि शिकायतों के त्वरित समाधान से किसानों का भरोसा प्रशासन पर बढ़ा है.

पर्यावरण संरक्षण के लिए “नमो फल वन” अभियान के तहत जिले में 10 लाख पौधरोपण का लक्ष्य तय किया गया, जिसमें आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई.

शिक्षा और युवाओं के लिए विशेष पहल

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मॉडल टेस्ट, करियर मार्गदर्शन और शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए गए, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें.

सख्त लेकिन संवेदनशील प्रशासक

किसान बीमा राशि में लापरवाही के एक मामले में कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद उन्होंने दबाव में आए बिना अगले ही दिन किसान के खाते में राशि पहुंचाकर यह संदेश दिया कि प्रशासन अब देरी नहीं, समाधान देगा.

प्रेरणा बना सागर मॉडल

संदीप जी.आर. ने यह साबित किया है कि जब प्रशासन संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समर्पण के साथ काम करता है, तो बदलाव केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ज़मीन पर दिखाई देता है. सागर में उनके कार्य अब पूरे बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुके हैं.

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