Holi 2026: सागर का श्रापित गांव ! होली का नाम सुनते ही सिहर उठते हैं लोग, पसर जाता है सन्नाटा, सदियों से नहीं हुआ होलिका दहन

Holi 2026: गांव में स्थित प्राचीन झारखंडन माता मंदिर को लेकर भी एक लोककथा प्रचलित है. ग्रामीण बताते हैं कि उनके पूर्वजों को झारखंडन माता ने स्वप्न में आदेश दिया था कि गांव में होलिका दहन नहीं किया जाए. कहा जाता है कि जब लोगों ने इस आदेश की अनदेखी की, तब आगजनी की घटना हुई.

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Holika Dahan 2026: बुंदेलखंड अंचल में आस्था और परंपराओं की कई अनोखी कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन सागर जिले से लगभग 70 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) से लगे हथखोय गांव की परंपरा लोगों को चौंका देती है. यहां सदियों से होलिका दहन नहीं किया जाता. ग्रामीणों का मानना है कि यदि गांव में होलिका दहन हुआ तो कोई बड़ी विपदा आ सकती है.

ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों पूर्व कुछ लोगों ने परंपरा तोड़ते हुए गांव में होलिका दहन किया था. इसके बाद पूरे गांव में भीषण आग लग गई थी, जिसमें कई घरों का सामान और फसलें जलकर खाक हो गई थीं. इस घटना के बाद से गांव में होलिका दहन पूरी तरह बंद कर दिया गया.

झारखंडन माता का प्राचीन मंदिर, आस्था का केंद्र

गांव में स्थित प्राचीन झारखंडन माता मंदिर को लेकर भी एक लोककथा प्रचलित है. ग्रामीण बताते हैं कि उनके पूर्वजों को झारखंडन माता ने स्वप्न में आदेश दिया था कि गांव में होलिका दहन नहीं किया जाए. कहा जाता है कि जब लोगों ने इस आदेश की अनदेखी की, तब आगजनी की घटना हुई. इसके बाद से गांववासी माता के आदेश को सर्वोपरि मानते हैं. होली के दिन पूरे गांव के लोग झारखंडन माता के मंदिर में एकत्रित होकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. यही कारण है कि आज तक गांव में होलिका दहन नहीं हुआ.

होली की रात गश्त, ताकि कोई न जला दे होलिका

ग्रामीण बताते हैं कि होली की रात कुछ लोग अलग-अलग स्थानों पर गश्त भी करते हैं, ताकि कोई व्यक्ति चुपके से होलिका दहन न कर दे. गांव में इस परंपरा का कड़ाई से पालन किया जाता है. अब सवाल यह उठता है कि ग्रामीणों के बीच यह भावना आस्था है या अंधविश्वास? हालांकि गांव के लोग इसे अपनी श्रद्धा और परंपरा से जुड़ा विषय मानते हैं और किसी भी तरह का जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं. बुंदेलखंड के इस गांव की यह अनोखी परंपरा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है.

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