मध्य प्रदेश के गुना जिले में तेंदुए के शिकार का मामला अब एक चौंकाने वाले खुलासे के साथ सामने आया है. जंगल में सिर, पंजे और खाल के बिना मिले तेंदुए के शव ने कुछ दिन पहले पूरे इलाके को हिला दिया. शुरुआत में वन विभाग को वन्यजीव तस्करी की आशंका थी, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो मामला अंधविश्वास से जुड़ा निकला. वन विभाग ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर तेंदुए का सिर, चारों पंजे और खाल बरामद कर ली है. पूछताछ में आरोपियों ने जो वजह बताई, उसने वन अधिकारियों को भी हैरान कर दिया.
जंगल में मिला था तेंदुए का क्षत-विक्षत शव
30 जुलाई 2026 को गुना जिले के उत्तर वन परिक्षेत्र की भदौरा सब रेंज के आगरा-हांसली जंगल में ग्रामीणों ने एक तेंदुए का शव देखा. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. जांच के दौरान सामने आया कि तेंदुए का सिर, चारों पंजे और पूरी खाल गायब थी. घटनास्थल की स्थिति देखकर अधिकारियों को साफ समझ आ गया कि यह प्राकृतिक मौत नहीं, बल्कि शिकार का मामला है. इसके बाद वन विभाग ने वन अपराध का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी.
डॉग स्कॉड और विशेष टीम ने जुटाए सुराग
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्कॉड की मदद ली गई और जंगल में सघन तलाशी अभियान चलाया. वन संरक्षक आदर्श श्रीवास्तव और वनमंडलाधिकारी अक्षय राठौर के निर्देशन में विशेष जांच टीम बनाई. तकनीकी साक्ष्यों, स्थानीय सूचना तंत्र और लगातार की गई कार्रवाई के आधार पर जांच टीम आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही.
चार आरोपी गिरफ्तार, अवशेष बरामद
जांच में हांसली गांव के चार लोगों के नाम सामने आए. वन विभाग ने खुमानसिंह बारेला, रमेश उर्फ पप्पू बारेला, लखन बारेला और डूमसिंह बारेला को गिरफ्तार किया. आरोपियों की निशानदेही पर जंगल से तेंदुए का कटा हुआ सिर, चारों पंजे, पूरी खाल और अन्य अवशेष बरामद किए गए. घटना में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी और हंसिया भी जब्त कर लिए गए हैं.
अंधविश्वास बना तेंदुए की मौत की वजह
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि उन्होंने कुछ मान्यताओं और अंधविश्वासों के कारण तेंदुए का शिकार किया. मुख्य आरोपी खुमानसिंह का कहना था कि उसने सुना था कि तेंदुए के सिर की हड्डी और नाखूनों से दवा बनाई जाती है. वहीं दूसरे आरोपी लखन ने बताया कि गांव में यह धारणा प्रचलित है कि तेंदुए की खाल घर में रखने से मवेशियों को बीमारी नहीं लगती. इसी सोच के चलते उन्होंने तेंदुए के शरीर के अलग-अलग हिस्से अपने पास रख लिए.
वन विभाग ने दावों को बताया निराधार
वन विभाग का कहना है कि आरोपियों द्वारा बताए गए इन दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. अधिकारी अब यह भी जांच कर रहे हैं कि मामला सिर्फ अंधविश्वास तक सीमित है या फिर इसके पीछे किसी बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का हाथ है. जांच एजेंसियां इस पहलू पर भी गहराई से काम कर रही हैं.
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने जंगलों में निगरानी और गश्त की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अगर नियमित निगरानी होती तो शायद तेंदुए का शिकार रोका जा सकता था. लोगों ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जंगलों में गश्त बढ़ाने और सख्त कदम उठाने की मांग की है.
14 दिन की रिमांड पर आरोपी
रेंजर के अनुसार, मामले में चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे तेंदुए का सिर, पंजे और खाल बरामद कर ली गई है. पूछताछ में उन्होंने शिकार के पीछे अंधविश्वास और कथित तांत्रिक मान्यताओं का हवाला दिया है. फिलहाल सभी आरोपियों को 14 दिन की रिमांड पर लिया गया है और पूरे मामले की जांच जारी है.