Farmers Suicides: कर्ज ने ले ली एक और किसान की जान; प्रशासन ने नकारा, जानिए क्या है मामला

Farmer Suicide: किसान की मौत के बाद जिला प्रशासन ने मामले की प्रारंभिक जांच की. अपर कलेक्टर के.आर. बड़ोले ने बताया कि प्रथम दृष्टया किसान पर कर्ज होने की बात सामने नहीं आई है और न ही रिकॉर्ड में ऐसा कोई विवरण मिला है. वहीं परिवार ने उम्मीद जताई है कि जांच में सभी तथ्यों को सामने लाया जाएगा और किसान की वास्तविक आर्थिक स्थिति स्पष्ट होगी.

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Farmers Suicides: कर्ज ने ले ली एक और किसान की जान; प्रशासन ने नकारा, जानिए क्या है मामला

Farmers Suicides in Khandwa: मध्य प्रदेश में खंडवा जिले के पिपलोद थाना क्षेत्र के रामपुरी रैयत गांव में एक किसान (Farmers Suicides) की संदिग्ध परिस्थितियों में जहर पीने से मौत हो गई. मृतक के परिजनों ने दावा किया है कि वह कर्ज के दबाव में था, जबकि जिला प्रशासन ने प्रथम दृष्टया कर्ज की बात से इनकार किया है. मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं. वहीं परिवार ने उम्मीद जताई है कि जांच में सभी तथ्यों को सामने लाया जाएगा और किसान की वास्तविक आर्थिक स्थिति स्पष्ट होगी.

10 लाख का बैंक लोन और सीज हुआ ट्रैक्टर

प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 50 वर्षीय किसान बाबूलाल ने 12 फरवरी की रात कथित रूप से जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया. परिजनों के अनुसार, बाबूलाल पर 10 लाख रुपये का बैंक लोन था और ट्रैक्टर भी लोन पर लिया गया था. किश्तें न भर पाने के कारण ट्रैक्टर को बैंक द्वारा सीज कर लिया गया था. परिवार का कहना है कि इस स्थिति से किसान पिछले कई दिनों से तनाव में था. घटना वाली रात वह शराब पीकर घर पहुंचा और उसके बाद जहर खा लिया. गंभीर हालत में परिजन उसे खंडवा शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

प्रशासन ने कर्ज के दावे को नकारा

किसान की मौत के बाद जिला प्रशासन ने मामले की प्रारंभिक जांच की. अपर कलेक्टर के.आर. बड़ोले ने बताया कि प्रथम दृष्टया किसान पर कर्ज होने की बात सामने नहीं आई है और न ही रिकॉर्ड में ऐसा कोई विवरण मिला है. उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई

फिलहाल पुलिस और राजस्व विभाग संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं. प्रशासन ने किसानों से जुड़ी ऐसी संवेदनशील घटनाओं पर सतर्कता बरतने और सत्यापन के बाद ही निष्कर्ष जारी करने पर जोर दिया है.

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