किसानों ने किया हंगामा! मंडी में समर्थन मूल्य और भुगतान को लेकर भड़के अन्नदाता, गेहूं बेचने से किया इनकार

देवास की अनाज मंडी में किसानों ने समर्थन मूल्य और भुगतान व्यवस्था को लेकर हंगामा किया. अन्नदाताओं का आरोप है कि गेहूं की बोली सरकार द्वारा तय एमएसपी 2625 रुपये से कम लग रही है, जबकि कैश या आरटीजीएस भुगतान को लेकर भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी.

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MSP Wheat Price Dispute: किसानों ने सोमवार सुबह देवास की अनाज मंडी में उस समय जोरदार हंगामा कर दिया, जब उन्हें पता चला कि उनके गेहूं की बोली सरकार द्वारा तय किए गए समर्थन मूल्य से कम लगाई जा रही है. भुगतान प्रक्रिया भी साफ न होने से अन्नदाता नाराज हो गए और उन्होंने मंडी परिसर में माल बेचने से इनकार कर दिया. धीरे‑धीरे स्थिति तनावपूर्ण हो गई और मामले को शांत कराने के लिए प्रशासन को बीच में आना पड़ा.

समर्थन मूल्य पर खरीद न होने से भड़के किसान

किसानों का कहना था कि वे सुबह 10 बजे से मंडी में समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उनकी उपज की बोली 2625 रुपये के समर्थन मूल्य से भी कम लगाई जा रही थी. इससे किसानों में गहरा आक्रोश पनपा और उन्होंने एकजुट होकर विरोध शुरू कर दिया.

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भुगतान प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

किसानों का आरोप था कि मंडी प्रशासन यह भी स्पष्ट नहीं बता रहा था कि भुगतान कैश में होगा या आरटीजीएस के माध्यम से. इस अस्पष्टता ने किसानों की नाराजगी और बढ़ा दी. उनका कहना था कि जब तक भुगतान की प्रक्रिया साफ नहीं होगी, वे माल बेचने को तैयार नहीं हैं.

मंडी में घंटों विवाद, प्रशासन ने संभाली स्थिति

बोली और भुगतान को लेकर किसानों और मंडी प्रशासन के बीच लगातार बहस चलती रही. इसी बीच सूचना मिलने पर तहसीलदार सपना शर्मा मौके पर पहुंचीं. उन्होंने किसानों और अधिकारियों के बीच बातचीत कर स्थिति शांत करने की कोशिश की, लेकिन किसान समर्थन मूल्य से कम पर गेहूं बेचने को राजी नहीं हुए.

किसान उचित दाम मिलने पर ही बेचेंगे उपज

मंडी में उस समय गेहूं 2200 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था, जबकि किसान समर्थन मूल्य से कम दाम पर माल बेचने को बिल्कुल तैयार नहीं थे. अन्नदाताओं का कहना है कि जब तक उन्हें घोषित दर पर उचित मूल्य नहीं मिलेगा, वे अपनी उपज मंडी में नहीं बेचेंगे. फिलहाल मंडी में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है.