हे अन्नदाता ! प्रदेश में आप पर 'सियासत' जारी है...आप मुआवजे का करें इंतजार

हाल के दिनों में मध्यप्रदेश के कई इलाकों में ओले गिरने की वजह से सैकड़ों एकड़ में फसल बर्बाद हो गई. सरसों,गेहूं और सब्जी की फसलों को नुकसान पहुंचा है जिससे अन्नदाता परेशान है...मायूस है. परेशानी ये है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही किसानों की परेशानी से परेशान तो दिख रहे हैं लेकिन हकीकत में उनकी गंभीरता दिखाई नहीं देती.

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Hailstorm in Madhya Pradesh: हाल के दिनों में मध्यप्रदेश के कई इलाकों में ओले गिरने की वजह से सैकड़ों एकड़ में फसल बर्बाद हो गई. सरसों,गेहूं और सब्जी की फसलों को नुकसान पहुंचा है जिससे अन्नदाता परेशान है...मायूस है. परेशानी ये है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही किसानों की परेशानी से परेशान तो दिख रहे हैं लेकिन हकीकत में उनकी गंभीरता दिखाई नहीं देती. हर साल की तरह इस साल भी किसान मुआवजे के इंतजार में है. NDTV की टीम ने  राज्य के कई इलाकों में हालात का जायजा लिया तो यही बात सामने आई. हालांकि सरकार ने जिलों के कलेक्टर को मुआवज़ा देने के लिए सर्वे के निर्देश दिए हैं.
सतना, पन्ना और छतरपुर जिलों में खेतों में ओले के सफेद चादर बिछे हैं. यहां चना, मटर, सरसों और गेहूं की फसल को ओले ने बर्बाद कर दिया है. किसानों का कहना है कि उनकी 90 फीसदी फसल बर्बाद हो गई है.चित्रकूट के किसान शिवकुमार बताते हैं कि ओले ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया. आसमान से गिरी आफत के सामने वे बेबस हैं. वे कहते हैं कि अब सरकार से ही आशा है. वे बताते हैं कि 11 से 14 फरवरी के बीच पूर्वी मध्य प्रदेश में ओलावृष्टि हुई है.  

दूसरी तरफ किसानों के मुआवजे का मुद्दा विधानसभा में भी गूंजा...लेकिन वहां भी न तो सत्ता पक्ष और न ही विपक्ष इस पर गंभीर दिखे. दरअसल कांग्रेस ने विधानसभा में नियम 139 के तहत ओलावृष्टि पर चर्चा की मांग रखी. सरकार ने मांग भी मान ली. अब आप सोच रहे होंगे कि इस दौरान खूब हंगामा हुआ होगा. लेकिन आप गलत हैं क्योंकि चर्चा में कांग्रेस के 66 में सिर्फ 16 विधायक मौजूद थे. इस दौरान खुद उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे भी गायब थे. इसके अलावा कांग्रेस के दो विधायक सदन को पुस्तकालय मानकर अखबार पढ़ने में मशगूल दिखाई दिए. हेमंत कटारे से जब इस मसले पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा  मैं ज़रा  राज्यसभा नामांकन के कामों में बिजी था इसलिए नहीं आया. लेकिन विधायकों की संख्या कम होने से कोई फर्क नहीं पड़ता. हम चाहते हैं कि बीजेपी सरकार किसानों को तत्काल मुआवजा दे. हम हवा में बात नहीं करते. अब जरा कुछ और नेताओं के बयान भी जान लीजिए. 

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दिल्ली से लेकर MP तक किसान परेशान है,मध्यप्रदेश सरकार तो एक गारंटी पूरी नहीं कर पायी है, आज सड़कों पर और खेतों में किसान रो रहे है.वे अपना हक़ मांग रहे हैं लेकिन सरकार को किसानों की फ़िक्र नहीं है.

जीतू पटवारी

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

हालांकि सरकार का कहना है कि उसे किसानों की फिक्र है.तभी तो उसने प्रभावित जिलों का सर्वे करने का आदेश दिया है. 

मैं खुद किसान परिवार से आता हूं , किसान की चिंता हमारी सरकार में सबसे ज़्यादा हुई है.परेशान किसानों की आवाज़ हम तक पहुंची है इसलिए हमने सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं.

प्रहलाद पटेल

मंत्री 

जाहिर है कृषि प्रधान मध्यप्रदेश में किसान सभी सियासी दलों की सियासत के केन्द्र में हैं लेकिन हकीकत ये है कि हमारे अन्नदाता मौसम के साथ-साथ सियासत की मार भी झेल रहे हैं.

अमृतांशी के साथ-साथ ज्ञान, विवेक और अरविंद की रिपोर्ट 

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