Chia seeds cultivation in Sagar: कभी सूखा और मौसम की मार झेलने वाला बुंदेलखंड अब खेती के नए प्रयोगों के लिए भी पहचाना जाने लगा है. परंपरागत खेती के साथ-साथ यहां के किसान नई फसलों को अपनाकर अच्छी आमदनी के रास्ते तलाश रहे हैं. सागर जिले के देवरी विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य केसली अंचल के प्रगतिशील किसान अनिरुद्ध सिंह ने भी ऐसा ही नवाचार कर क्षेत्र के किसानों के सामने एक नई मिसाल पेश की है. उनकी मेहनत और लगन से अब बुंदेलखंड की माटी में चिया सीड्स जैसी महंगी और पौष्टिक फसल भी लहलहा रही है.
कभी कम वर्षा और कठिन परिस्थितियों के कारण खेती को घाटे का सौदा मानने वाले बुंदेलखंड के किसान अब नई तकनीक और वैकल्पिक फसलों के जरिए खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे में किसान अनिरुद्ध सिंह का यह प्रयोग छोटे और सीमांत किसानों के लिए प्रेरणादायक बनता जा रहा है. बुंदेलखंड की माटी चिया सीड्स की खेती के लिए उपजाऊ और उपयुक्त साबित हो रही है, जिससे गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है.
प्रगतिशील किसान अनिरुद्ध सिंह ने इस वर्ष अपने श्री किसान फार्म हाउस पर करीब डेढ़ एकड़ भूमि में चिया सीड्स की बुवाई की है. यह फसल देखने में भले ही छोटी लगे, लेकिन इसकी बाजार में काफी अधिक मांग है. चिया सीड्स को दुनिया भर में “सुपर फूड” के रूप में जाना जाता है. इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. यही कारण है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इसे अपने आहार में तेजी से शामिल कर रहे हैं.
Chia seeds: चिया सीड्स की खेती से लाखों की हो रही कमाई.
विशेषज्ञों के अनुसार, चिया सीड्स का नियमित सेवन हृदय को स्वस्थ रखने, पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, वजन नियंत्रित करने और ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित रखने में मददगार माना जाता है. इसके अलावा यह त्वचा और बालों के लिए भी लाभकारी बताया जाता है, जिसके कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
कम पानी में अधिक मुनाफे वाली फसल
किसान अनिरुद्ध सिंह बताते हैं कि चिया सीड्स की खेती कम पानी में भी आसानी से की जा सकती है, जो बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र के लिए काफी उपयुक्त है. उनके अनुसार एक एकड़ खेत में करीब ढाई किलो बीज की बुवाई करने पर औसतन 6 से 7 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो जाता है. बाजार में इसकी कीमत 25 हजार से 35 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक मिल जाती है. इस हिसाब से किसान कम लागत में अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं.
अनिरुद्ध सिंह का कहना है कि वे अपने फार्म पर तैयार होने वाली अधिकांश उपज का ऑनलाइन विक्रय भी करते हैं, जिससे उन्हें देशभर के ग्राहकों तक पहुंचने का मौका मिलता है और बेहतर दाम मिल पाते हैं.
नई फसलों को अपनाने की प्रेरणा
अनिरुद्ध सिंह केवल चिया सीड्स की खेती तक ही सीमित नहीं हैं. उन्होंने सागर जिले में सबसे पहले स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत भी की थी. अपने फार्म हाउस पर वे अब तक करीब 45 प्रकार की अलग-अलग फसलों की खेती कर चुके हैं. उनका मानना है कि यदि किसान नई तकनीक और आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाएं तो बुंदेलखंड की खेती भी समृद्ध और लाभकारी बन सकती है.
आज उनके इस प्रयोग को देखकर क्षेत्र के कई किसान भी चिया सीड्स और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती की ओर रुचि दिखा रहे हैं. अनिरुद्ध सिंह की यह पहल न केवल खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि बुंदेलखंड के किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण भी बनती जा रही है.