बुंदेलखंड क्षेत्र में किसान जहां पारंपरिक खेती और मौसम की मार से जूझ रहे हैं... वहीं सागर जिले की खुरई तहसील के छोटे से गांव खिमलासा के एक किसान ने आधुनिक सोच और नई तकनीक के जरिए खेती से करोड़ों रुपये का मुनाफा कर एक नई मिसाल पेश की है. सात एकड़ में विकसित अपने एक्वेटिक वेजिटेबल फार्म के माध्यम से 43 वर्षीय किसान अमित जैन ने न सिर्फ आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गए हैं... इतना ही नहीं वो कई लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं..
Vegetables Cultivation: पिता की आखिरी इच्छा ने अमित जैन की बदल दी किस्मत.
पिता की आखिरी इच्छा पूरा करने के लिए शुरु की सब्जी की खेती
किसान अमित जैन बी.कॉम तक पढ़ाई की हैं. पढ़ाई पूरी होने के बाद वो मेडिकल शॉप का संचालन करते थे, लेकिन वर्ष 2012 में उनके पिता के निधन के बाद परिवार की खेती की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. पिता की इच्छा थी कि बेटा भी खेती करे, लेकिन कुछ अलग और नया करे... इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए अमित ने खेती में नवाचार का रास्ता चुना.
ब्रोकली, रेड कैबेज, चाइना कैबेज की शुरू की खेती
खेती संभालने के बाद अमित जैन ने शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी जुटाई और उद्यानिकी विभाग, सागर से आधुनिक खेती का प्रशिक्षण प्राप्त किया. प्रशिक्षण के बाद उन्होंने एक्वेटिक पद्धति से ब्रोकली, रेड कैबेज, चाइना कैबेज, लेट्यूस सहित कई उन्नत और विदेशी किस्म की सब्जियों की खेती शुरू की. शुरुआत में जोखिम जरूर था, लेकिन मेहनत और सही तकनीक के चलते उन्हें उम्मीद से कहीं बेहतर परिणाम मिले.
दिल्ली से इन सब्जियों का डिमांड
अमित जैन बताते हैं कि उनकी उगाई गई सब्जियां केवल सागर जिले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भोपाल, इंदौर और दिल्ली तक सप्लाई की जाती हैं. खासतौर पर दिल्ली की मंडियों और फाइव स्टार होटलों में इन सब्जियों की काफी मांग है, जहां इनके दाम 50 रुपये प्रति किलो से ऊपर मिलते हैं. कई बार ऑर्डर इतने अधिक हो जाते हैं कि वो सभी मॉल और होटलों की मांग पूरी नहीं कर पाते.
एक साल में 12 लाख से अधिक का मुनाफा
एक्वेटिक सब्जियों की खेती से अमित जैन महीने में एक लाख रुपये से अधिक की आमदनी कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में कम पानी में अधिक उत्पादन देती है और बदलते मौसम का असर भी अपेक्षाकृत कम पड़ता है. यही कारण है कि यह पद्धति बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्र के लिए बेहद कारगर साबित हो रही है.
बेटियां भी फ्री टाइम में कर रही सहयोग
अमित जैन की तीन बेटियां हैं, जो अभी स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं. पिता की मेहनत और खेती के प्रति समर्पण को देखकर वो भी छुट्टियों और खाली समय में छोटे-मोटे कृषि कार्यों में सहयोग करती हैं. अमित मानते हैं कि बच्चों को खेती से जोड़ना भविष्य के लिए बेहद जरूरी है.
आज अमित जैन न केवल खुद आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि आसपास के किसानों को भी आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं. उद्यानिकी विभाग से उन्हें इरिगेशन सिस्टम, पैक हाउस निर्माण और बर्मी कंपोस्ट के लिए सब्सिडी भी मिली, जिससे लागत कम हुई और मुनाफा बढ़ा. खिमलासा का यह किसान साबित कर रहा है कि सही जानकारी, प्रशिक्षण और नई सोच के साथ खेती को भी सफल और लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है.
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