Fake License Racket: भिंड में 3 लाख में फर्जी हथियार लाइसेंस का बड़ा खेल उजागर, सुरक्षा के लिए बढ़ा खतरा

fake weapons license in Madhya Pradesh: फर्जी लाइसेंसों पर क्यूआर कोड, कलेक्टर कार्यालय और एसपी कार्यालय की सील, साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों जैसे हस्ताक्षर तक लगाए गए थे. लेकिन जब दस्तावेजों की पड़ताल हुई, तो ये लाइसेंस न तो कलेक्ट्रेट की आर्म्स शाखा में दर्ज मिले और न ही पुलिस रिकॉर्ड में इनका कोई उल्लेख पाया गया.

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Fake weapons License Racket in Bhind: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के भिंड (Bhind) जिले में फर्जी हथियार लाइसेंस (Fake weapons Licenses) का एक बड़ा और बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है. आरोप है कि करीब 3 लाख रुपये में ऑल इंडिया वैधता वाले फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार कराए जा रहे थे, जिनके आधार पर सैकड़ों की संख्या में हथियार खरीदे गए. शुरुआती जांच में इस फर्जीवाड़े का नेटवर्क भिंड, ग्वालियर, उत्तर प्रदेश के इटावा-लखना और जम्मू–कश्मीर तक फैला होने की बात सामने आई है.

चौंकाने वाली बात यह है कि फर्जी लाइसेंसों पर क्यूआर कोड, कलेक्टर कार्यालय और एसपी कार्यालय की सील, साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों जैसे हस्ताक्षर तक लगाए गए थे. लेकिन जब दस्तावेजों की पड़ताल हुई, तो ये लाइसेंस न तो कलेक्ट्रेट की आर्म्स शाखा में दर्ज मिले और न ही पुलिस रिकॉर्ड में इनका कोई उल्लेख पाया गया. खुलासे में बताया गया कि दतिया में करीब 50 लाइसेंस, ग्वालियर और भिंड के लहार क्षेत्र में कई लाइसेंस पहले ही जारी किए जा चुके हैं. इन लाइसेंसों के आधार पर संबंधित लोगों को हथियार भी उपलब्ध कराए जाने की आशंका जताई गई है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है.

प्रशासन और पुलिस हरकत में, जांच शुरू

मामला सामने आते ही पुलिस अधीक्षक असित यादव ने इसे गंभीर मानते हुए जांच शुरू कर दी है. वहीं कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने भी जांच समिति गठित कर दी है. कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान सामने आए कई हथियार लाइसेंस फर्जी पाए गए हैं और पूरे प्रकरण की तकनीकी व दस्तावेजी जांच कराई जा रही है.

क्यूआर कोड भी निकला फर्जी

फर्जी लाइसेंसों पर भले ही क्यूआर कोड छपा हो, लेकिन जांच में यह भी फर्जी निकला. अधिकारियों के अनुसार जब इन लाइसेंसों को स्कैन किया गया, तो किसी अधिकृत पोर्टल पर कोई वैध जानकारी सामने नहीं आई. प्रशासन ने साफ किया कि जिन लाइसेंसों पर भिंड का नाम अंकित है, वे न तो कलेक्टर कार्यालय के रिकॉर्ड में हैं और न ही एसपी कार्यालय में उनका कोई विवरण दर्ज है.

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ऑल इंडिया परमिशन और ज्यादा कारतूस की अनुमति

मध्यप्रदेश में वैध हथियार लाइसेंस पर आमतौर पर एक बार में 10 कारतूस और साल भर में अधिकतम 25 कारतूस की सीमा रहती है. लेकिन इस फर्जी लाइसेंस गिरोह ने दस्तावेजों में 50 से 100 कारतूस तक की अनुमति लिख दी. इतना ही नहीं, फर्जी लाइसेंस पर पूरे भारत में वैधता (All India Permission) और 2028 तक लाइसेंस अवधि दर्शाई गई. यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं रहा, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है.

हूबहू हस्ताक्षर और सरकारी सील की नकल

जांच में सामने आया कि कई फर्जी लाइसेंस पर अपर जिला दंडाधिकारी (ADM) के हूबहू हस्ताक्षर और सरकारी सील लगी है. बताया गया कि वर्तमान में पदस्थ एडीएम एलके पांडेय के नाम और हस्ताक्षर की नकल कर दस्तावेज तैयार किए गए. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने ऐसे किसी लाइसेंस पर हस्ताक्षर नहीं किए.

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जम्मू–कश्मीर होम डिपार्टमेंट की सील का भी इस्तेमाल

इस गिरोह की सबसे खतरनाक बात यह है कि दस्तावेजों में Government of Jammu and Kashmir, Home Department की सील और “Under Secretary to Government” जैसी मुहरों का उपयोग भी किया गया. कुछ मामलों में 2016-17 के दौरान जम्मू-कश्मीर में डीसी के नाम से लाइसेंस बनवाने की बातें भी सामने आई हैं, जिससे यह फर्जीवाड़ा बहुराज्यीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है.

दलाल, आर्म्स डीलर और फर्जी दस्तावेजों से चलता था सिस्टम

जांच में सामने आया है कि फर्जी लाइसेंस बनवाने के लिए एक पूरा सिस्टम काम कर रहा था. आरोप है कि उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के लखना कस्बे में स्थित “अटल सिंह कुशवाह आर्म्स एंड एम्युनिशन” नामक दुकान के जरिए यह नेटवर्क ऑपरेट किया जा रहा था. बताया जा रहा है कि पहले आधार कार्ड में पता बदलवाकर भिंड का पता जोड़ दिया जाता था, फिर आर्म्स लाइसेंस पोर्टल पर ऑनलाइन प्रक्रिया दिखाकर फर्जी लाइसेंस तैयार किए जाते थे. जांच में यह भी सामने आया कि महाराष्ट्र के रहने वाले हेमंत राजेंद्र देवरे और राहुल दौलत पाटिल के आधार में भी भिंड का पता जोड़कर फर्जी लाइसेंस बनाए गए.

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3 लाख लेकर “गारंटी” देता था डीलर

सूत्रों के मुताबिक ग्वालियर का एक डीलर करीब 3 लाख रुपये लेकर आधार, पैन कार्ड और फोटो के आधार पर हथियार लाइसेंस बनवाने की “गारंटी” देता था. लाइसेंस बनने में करीब 6 महीने का समय बताया जाता था, लेकिन दावा है कि पूरी प्रक्रिया पहले से सेट रहती थी और आवेदक को बाद में फर्जी लाइसेंस का प्रिंट दे दिया जाता था.

फर्जी बताए गए लाइसेंस धारकों के नाम भी सामने आए

जांच में जिन लोगों के लाइसेंस भिंड और जम्मू के डीएम कार्यालय रिकॉर्ड में फर्जी बताए गए, उनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं—

  •  अजीत सिंह (कृष्णा नगर, भिंड)
  •  अशोक कुशवाहा (मढैया पुरा, लहार)
  •  गौरव सिंह भदौरिया (गांधी नगर, भिंड)
  •  हेमंत राजेंद्र देवरे (जमुना रोड, भिंड)
  •  राहुल दौलत पाटिल (महावीर गंज, भिंड)
  •  जावेद अनवर (वीरेंद्र नगर, भिंड)
  •  मो. राशिद (महावीर नगर, भिंड)


(इनसे जुड़े हथियारों के विवरण को लेकर भी जांच चल रही है.)

जांच जारी, प्रशासन में हड़कंप

मामला उजागर होते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि क्यूआर कोड, सील और हस्ताक्षरों की तकनीकी जांच कराई जा रही है. साथ ही दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यह प्रकरण केवल एक दस्तावेजी घोटाला नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम में सेंध और देश की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाला मामला बन चुका है.

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