कितना सुरक्षित है दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे? 3 साल में 992 रोड सड़क; सबसे ज्यादा एक्सीडेंट होने की ये है वजह

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बढ़ती दुर्घटनाओं ने सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पिछले तीन वर्षों में यहां 992 सड़क हादसे हुए हैं, जिसमें 2030 लोग घायल और 60 मौतें दर्ज हुईं। अकेले वर्ष 2025 में 39 लोगों की मौत हो चुकी है.

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Road Accidents: देश की सबसे आधुनिक सड़कों में गिने जाने वाले दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे (Delhi–Mumbai Expressway) पर बढ़ती दुर्घटनाओं ने सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. पिछले तीन वर्षों में यहां 992 सड़क हादसे हुए हैं, जिसमें 2030 लोग घायल और 60 मौतें दर्ज हुईं. अकेले वर्ष 2025 में 39 लोगों की मौत हो चुकी है.

हादसों की प्रमुख वजहों में तेज रफ्तार, असामान्य ढलान और नींद की बात सामने आई है. जांच में सामने आया है कि ज्यादातर हादसों में वाहन निर्धारित स्पीड लिमिट से कहीं ज्यादा रफ्तार में थे. तेज गति के साथ असामान्य ढलान जुड़ने पर वाहन पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो जाता है. पिछले शुक्रवार को हुए बड़े हादसे में भी यही कारण सामने आया. कार ओवरटेकिंग लेन से फिसलकर 300 फीट तक पथरीले हिस्से से घिसटती हुई आखिरकार 50 फीट गहरी खाई में जा गिरी, जिसमें वाहन में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई.

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अधिकारियों ने बताया कि सुबह और रात के समय हादसे ज्यादा होते हैं. सड़क पूरी तरह सीधी होने की वजह से ड्राइवर को अधिक गतिविधि नहीं करनी पड़ती, जिसके कारण थकान और नींद आने की संभावना बढ़ जाती है. कई मामलों में झपकी आने से वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं.

टायर फटना और बाइकर्स भी बन रहे कारण

कई हादसों में टायर फटना भी बड़ा कारण बनकर सामने आया है. इसके अलावा, एक्सप्रेस-वे की रेलिंग के नीचे से बाइक सवार अचानक सड़क पर आ जाते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं होती हैं. ऐसे मार्गों को बंद करने और गश्त बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

रील बनाने वालों से भी खतरा

कुछ लोग रील और वीडियो बनाने के उद्देश्य से एक्सप्रेस-वे पर पहुंच जाते हैं. एनएचएआई टीम उन्हें लगातार समझाइश दे रही है, क्योंकि हाई स्पीड वाले इस मार्ग पर मामूली गलती भी बड़े हादसे में बदल सकती है.

हर दो किलोमीटर पर कैमरे, तत्काल रेस्क्यू

एनएचएआई (NHAI) ने एक्सप्रेस-वे (Expressway) पर हर दो किलोमीटर पर हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे लगाए हैं. किसी भी हादसे या संदिग्ध गतिविधि को दिखाई देते ही कंट्रोल रूम से रेस्क्यू दल तुरंत मौके पर रवाना कर दिया जाता है.

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एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप पाटीदार ने बताया कि 8-लेन एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक की शुरुआत दिसंबर 2023 में की गई थी. उन्होंने कहा कि रात और सुबह के समय ड्राइवर को नींद आने की वजह से हादसे ज्यादा होते हैं.

  • कुछ मामलों में टायर फटना भी जिम्मेदार है.
  • कारों की रफ्तार सामान्य सीमा से काफी ज्यादा देखी गई है.
  • रील बनाने वालों को बार-बार समझाइश दी जाती है.

स्पीड कंट्रोल पर भी मंथन

रतलाम एसपी अमित कुमार का कहना है कि दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण तेज रफ्तार है. सड़क के जिन हिस्सों में निर्माण संबंधी तकनीकी मुद्दे मिले हैं, उन्हें लेकर विभाग से चर्चा जारी है. स्पीड कंट्रोल के लिए नई रणनीतियों पर भी विचार हो रहा है.

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