Cyber Fraud Gang Busted: मध्य प्रदेश पुलिस ने एक बड़े साइबर रैकेट का खुलासा करते हुए उन आरोपियों को पकड़ा है, जो अश्लील वीडियो चैट ऐप के बहाने लोगों को ब्लैकमेल कर अवैध वसूली करते थे. यह नेटवर्क सिर्फ शिवपुरी तक सीमित नहीं था, बल्कि राजस्थान, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों तक फैला हुआ था. पुलिस का कहना है कि यह मध्य प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा साइबर स्कैम हो सकता है. मुख्यालय भोपाल के निर्देश पर की गई कार्रवाई में अब तक 32 नामजद आरोपियों में से 20 को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस ने आरोपियों से एक करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति, कई लग्जरी कारें, जमीन और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं. आशंका है कि कुल बरामदगी करोड़ों तक पहुंच सकती है.
Cyber fraud gang busted: शिवपुरी पुलिस घटना की जानकारी देते हुए
पुलिस का क्या कहना है?
पुलिस ने ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स' के तहत आरोपियों से मोबाइल फोन और चार पहिया वाहन समेत करीब 1.07 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है. पुलिस के अनुसार, आरोपी ‘डेटिंग और चैटिंग' एप के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे. पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़ ने बताया कि नौ विशेष टीमों ने करेरा, भोंटी और पिछोर क्षेत्रों में छापेमारी कर आरोपियों को पकड़ा. उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह चार प्रकरण दर्ज किए गए थे, जिनमें 32 आरोपियों को नामजद किया गया है, और इनमें से अब तक 20 को गिरफ्तार किया जा चुका है. राठौड़ ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में अंगद लोधी, विशाल लोधी, सुखदेव, अर्जुन और दीपक प्रजापति शामिल हैं. उन्होंने बताया कि अधिकतर आरोपी शिवपुरी और झांसी क्षेत्र के निवासी हैं. उन्होंने कहा कि शेष 12 फरार आरोपियों की तलाश जारी है.
Cyber fraud gang busted: पकड़ी गईं कार
भौंती और करेरा थानों से चल रहा था ब्लैकमेलिंग नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया कि शिवपुरी के भौंती और करेरा क्षेत्रों से लगातार ब्लैकमेलिंग कॉल किए जा रहे थे. आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत मिले हैं, जो उनके विस्तृत नेटवर्क का खुलासा करते हैं. एसपी शिवपुरी अमन सिंह राठौर ने बताया कि यह गिरोह वीडियो चैटिंग ऐप के माध्यम से लोगों को जाल में फंसाता था और फिर स्क्रीन रिकॉर्डिंग का उपयोग कर उन्हें ब्लैकमेल करता था.
Cyber fraud gang busted: गिराफ्तार किए गए आरोपी
कैसे फंसाते थे आरोपी?
पुलिस के अनुसार, गिरोह में शामिल महिलाएं पहले व्हाट्सएप के जरिए पर्सनल वीडियो चैट का ऑफर भेजती थीं. जैसे ही कोई व्यक्ति चैट स्वीकार कर लेता, गिरोह उसकी गतिविधि रिकॉर्ड कर लेता और फिर खुद को पुलिस या CID अधिकारी बताकर डराता था. आरोपी पीड़ितों को धमकी देते “तुम पर POCSO एक्ट लग जाएगा, मामला गंभीर है…” इसके बाद भारी रकम की मांग की जाती थी. पुलिस का कहना है कि कई पीड़ित शर्म और सामाजिक डर की वजह से सामने ही नहीं आते थे.
कई राज्यों में फैला जाल; एजेंट और हैंडलर सक्रिय
पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क के एजेंट सिर्फ मध्य प्रदेश में ही नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैले थे. अब तक सामने आए पीड़ित राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से हैं. यह एक संगठित और प्लांड साइबर रैकेट था, जिसमें कई स्तरों पर लोग शामिल थे.
Cyber fraud gang busted: बरामद किए गए सामान
छापेमारी में आरोपियों के पास से से सब मिला
- 30+ मोबाइल फोन
- बड़ी संख्या में ATM कार्ड
- बैंकों की पासबुक
- कई सिम कार्ड
- डिजिटल रिकॉर्डिंग डिवाइस
इन सबका उपयोग ब्लैकमेलिंग और पैसों के लेनदेन में किया जा रहा था.
हर किसी के फोन में मौजूद वीडियो चैट ऐप बन रहा था जाल
पुलिस ने चेतावनी दी कि वीडियो चैट ऐप्स मी स्टोर और अन्य प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध हैं और इनके जरिए काम करने वाला अपराधियों का नेटवर्क बेहद सक्रिय है. सीधे-साधे लोग टाइमपास के लिए इन ऐप्स का उपयोग करते हैं और फिर साइबर जाल में फंस जाते हैं. पुलिस ने कहा “थोड़ी-सी लापरवाही इंसान को शातिर साइबर अपराधियों का शिकार बना देती है.”
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