सीहोर में जिला पंचायत परिसर में इन दिनों दो भवनों के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है, लेकिन यह विकास कार्य अब विवादों के घेरे में है. ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा विभाग की देखरेख में हो रहे करीब 20 लाख रुपये के काम में गुणवत्ता की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. ताज्जुब की बात यह है कि जिस कार्यालय में बैठकर अधिकारी पूरे जनपद क्षेत्र के विकास की योजना बनाते हैं, उसी परिसर में उनकी नाक के नीचे घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है.
बता दें नियमों के अनुसार, निर्माण एजेंसी को खुद काम की निगरानी करनी चाहिए, लेकिन यहां खेल कुछ और ही है. मुख्य ठेकेदार ने काम को पेटी कॉन्ट्रैक्टर के हवाले कर दिया है. नतीजतन निगरानी के अभाव में कॉन्ट्रैक्टर अपनी मनमर्जी चला रहा है. दोनों भवनों में प्लास्टर, टाइल्स, वाटर प्रूफिंग, विद्युतीकरण और पुट्टी का काम होना है, लेकिन काम की रफ्तार और क्वालिटी दोनों ही सवालों के घेरे में हैं.
रेत गायब, चूरी से हो रहा टाइल्स फिटिंग, सीमेंट गायब
मौके पर मौजूद सामग्री को देखकर कोई भी बता सकता है कि काम कितना ईमानदारी से हो रहा है. टाइल्स लगाने और प्लास्टर करने में जिस रेत का इस्तेमाल होना चाहिए, उसकी जगह धड़ल्ले से चूरी मिलाई जा रही है. चूरी के इस्तेमाल से निर्माण कुछ समय के लिए तो चकाचक दिखता है, लेकिन बहुत जल्द प्लास्टर और टाइल्स छोड़ने लगते हैं. निर्माण स्थल पर लंबे समय से किसी इंजीनियर ने विजिट तक नहीं की है, जिससे ठेकेदार के हौसले बुलंद हैं। गुणवत्ता हीन और घटिया निर्माण यहां चल रहा. टाइल्स लगाने में सीमेंट का उपयोग नाम मात्र का किया गया है.
ईई बोले- काम खराब हुआ तो उखड़वा दूंगा
इस संबंध में आरईएस के ईई एके पंथी का कहना है कि यदि काम में गुणवत्ता की कमी पाई गई या घटिया सामग्री का उपयोग हुआ तो मैं न केवल काम रुकवाऊंगा, बल्कि लगी हुई टाइल्स को उखड़वाकर फिर से नए सिरे से काम करवाऊंगा. लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी.
ये भी- मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की आज की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें