Success Story of Farmer: कहते हैं अगर सोच मजबूत हो, तो बंजर जमीन भी उम्मीद की फसल उगा देती है. आज हम आपको ऐसी ही एक खबर देने जा रहे हैं, जहां मिट्टी नहीं, सूरज की रोशनी कमाई का साधन बन रहा है. दरअसल, मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के हनुमना नगर परिषद क्षेत्र के एक किसान ने वो कर दिखाया है, जो अब तक सिर्फ योजनाओं में सुना जाता था. बंजर पड़ी जमीन को सोलर पावर प्लांट में बदलकर किसान हरिदास यादव ने साबित कर दिया कि खेती के साथ-साथ ऊर्जा भी किसान की ताकत बन सकती है.
जिस पथरीली जमीन पर कभी हल चलाना भी मुश्किल था, आज उसी जमीन पर सूरज की रोशनी से बिजली पैदा हो रही है. हनुमना नगर परिषद के वार्ड नंबर 3 निवासी किसान हरिदास यादव ने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री कुसुम योजना का लाभ उठाते हुए अपनी अनुपयोगी 8 एकड़ की भूमि पर सोलर पावर प्लांट स्थापित कर डाला. अब यहां उत्पादन होने वाली 2 मेगावाट की बिजली MPPCL को बेची जाएगी. दिसंबर 2025 से प्लांट का काम शुरू हुआ था, जो अब अंतिम दौर में है.
पुराना अनुभव आया काम
हरिदास यादव जल संसाधन विभाग से सेवानिवृत्त हैं, जिन्होंने अलग-अलग जगह हरदा, पिपरिया रीवा और उमरिया जैसी जगहों पर बतौर उपयंत्री के पद पर पदस्थ रह चुके हैं. लिहाजा, उन्होंने अपने अनुभवों को बटोरते हुए ये साबित कर दिया है कि बंजर भूमि को उपयोगी बनाया जा सकता है. कुछ अलग करने की प्रेरणा लिए सोलर प्लांट स्थापित कर अब क्षेत्र के लोगों की प्रेरणा बन रहे हैं.
9.5 करोड़ रुपये से तैयार हुआ प्लांट
हरिदास बताते हैं कि जब कुछ अलग काम करो, तो शुरुआत में कठिनाइयों का सामना जरूर करना पड़ता है, लेकिन जब उद्देश्य बना लिया जाय, तो सब कुछ मुमकिन है. शुरुआत में कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा, जैसे लीज, डीड, खसरा, सर्च रिपोर्ट, वैल्युएशन इत्यादि साथ ही MPPCL से टाई अप कर विद्युत सप्लाई का एग्रीमेंट तक का सफर. जिसकी कुल लागत 9.5 करोड़ रुपए थी, जिसमें से 75 प्रतिशत तक बैंक से फाइनेंस मिला. शेष 25 प्रतिशत स्वयं से व्यय करना पड़ा.
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नगर परिषद के वार्ड नंबर एक में लगभग 8 एकड़ जमीन पर यह सोलर परियोजना आकार ले रही है. इसमें 7.30 एकड़ जमीन लीज पर ली गई है, जबकि 50 डिसमिल जमीन किसान की स्वयं की है. स्लैंको कंपनी गुड़गांव द्वारा सोलर प्लांट का काम किया जा रहा है. करीब 9.5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह सोलर प्लांट, पूरी तरह चालू होने के बाद 2 मेगावाट बिजली उत्पादन करेगा. यानी हर दिन लगभग 10 हजार यूनिट बिजली पैदा कर यह प्लांट एमपीपीसीएल को सप्लाई कर बिजली की आपूर्ति को पूरा करने के साथ ही लाभ का जरिया बनेगा.
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