सतना के इस स्कूल-कॉलेज में धार्मिक आधार पर भर्ती विज्ञापन से विवाद, संस्थान ने बताया कैसा चाहिए टीचर

एक शिक्षण संस्थान में शिक्षकों और अन्य स्टाफ की नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन पर विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में धर्म को प्राथमिकता दी जा रही है, जो संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार के विपरीत है.

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Madhya Pradesh Hindi News: मध्य प्रदेश के सतना जिले में शहर के विवादित निजी शिक्षण संस्थान मिशनरी क्रिस्तुकला स्कूल एवं कॉलेज में भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. संस्थान द्वारा जारी एक कथित विज्ञापन में प्रतिबद्ध ईसाई अभ्यर्थी चाहिए लिखे जाने के बाद सामाजिक और शैक्षणिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है.

जानकारी के अनुसार, शिक्षकों और अन्य स्टाफ की नियुक्ति के लिए जारी इस विज्ञापन को लेकर यह आरोप लगाया जा रहा है कि भर्ती प्रक्रिया में धर्म को प्राथमिकता दी जा रही है. आलोचकों का कहना है कि शिक्षा जैसे क्षेत्र में चयन का आधार योग्यता और अनुभव होना चाहिए, न कि किसी विशेष धर्म से जुड़ाव. उनका तर्क है कि इस प्रकार का उल्लेख संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार की भावना के विपरीत है.

सामाजिक सौहार्द के लिए चिंताजनक

स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग ने इस मामले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शिक्षण संस्थान समाज में समरसता और सर्वधर्म समभाव का संदेश देते हैं. ऐसे में यदि भर्ती प्रक्रिया में धार्मिक पहचान को प्रमुख शर्त बनाया जाता है तो यह सामाजिक सौहार्द के लिए चिंताजनक संकेत हो सकता है.

हालांकि, कुछ जानकारों का यह भी मत है कि यदि संस्थान अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त है तो उसे अपने धार्मिक मूल्यों के अनुरूप नियुक्ति में प्राथमिकता देने का अधिकार हो सकता है. इस बिंदु पर स्पष्टता के लिए प्रशासनिक जांच आवश्यक बताई जा रही है.

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मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप और तथ्यों की जांच की मांग उठ रही है. अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और भर्ती प्रक्रिया को लेकर क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं.

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