Chhattisgarh Conversion Law: छत्तीसगढ़ में धर्मान्तरण को लेकर जारी विवाद रुकने नाम नहीं ले रहा है. अब ताजा मामला ईसाई लोगों को बहिष्कृत करने और घर वापसी के के लिए दबाव बनाने का सामने आया है. दरअसल, छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम ने आरोप लगाया है कि राज्य में धर्मान्तरण रोकने के लिए बनाए गए धर्म स्वातंत्र्य कानून बनने के बाद धर्मांतरित लोगों पर घर वापसी का दबाव बनाया जा रहा है. फोरम का कहना कि नए कानून आने के बाद बस्तर में इसाई लोगों को बहिष्कृत करने और घरवापसी के दबाव की घटनाएं बढ़ गई है.
दरअसल, बस्तर के अंदरूनी गांव में आदिवासी और धर्म परिवर्तित मसीही समाज के बीच संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही है. अंतागढ़ के कानागांव के दुग्गा परिवार का आरोप है कि गांव के लोग उनके घर की लकड़ियां ले गए और उनपर घरवापसी का दबाव बनाया जा रहा है. वहीं, क्रिश्चियन फोरम के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पन्ना लाल का कहना है कि नए कानून के बाद घरवापसी का दबाव बनाने की घटना बढ़ी है. इस मामले में सबसे दुखद पक्ष ये है कि पुलिस में शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं होती है.
घर वापसी पर गरमाई सियासत
इन सबके बीच कांग्रेस ने जबरन घर वापसी को भी धर्मांतरण की श्रेणी में लाने की मांग की है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.कांग्रेस के मीडिया चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला ने इस पूरे मामले पर कहा कि जबरन घर वापसी को भी धर्मांतरण की श्रेणी में लाना चाहिए और ऐसे में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. वहीं, भाजपा इस मुद्दे से सधी हुई प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी प्रवक्ता राजीव चक्रवर्ती ने कहा कि साय सरकार में नियम से ही कार्रवाई होगी.
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बस्तर में नक्सलवाद के बाद धर्मांतरण को लेकर वर्ग संघर्ष एक बड़ी समस्या बन सकती है. ऐसे में शासन को कानून का सख्ती से पालन करना होगा.
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