बिजली गिरने से बच्चे की मौत, 4-5 दिन रहा एडमिट, भर्ती से पहले स्ट्रेचर पर लेकर कई घंटे तक घूमते रहे थे परिजन

परिजन बच्चे को लेकर सबसे पहले महोबा से पन्ने पहुंचे थे, जहां से उसे रीवा के संजय गांधी अस्पताल रेफर कर दिया था. वह वहां पहुंचे थे. जब पहुंचे थे काफी देर तक परिजन उसे अस्पताल में लेकर घूमते रहे थे.

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मध्य प्रदेश के रीवा जिले से बहुत ही दर्दनाक खबर सामने आई है. बिजली गिरने से गंभीर रूप से घायल हुए बच्चे को लेकर परिजन अस्पताल में लेकर ही घूमते रहे. बच्चा स्ट्रेचर पर था और ड्रिप की बोलत हाथ में थी, परिजन बच्चे को लेकर कभी बर्न यूनिट में जाते तो कभी, इमरजेंसी में जाते. हालांकि बच्चा चाइल्ड वार्ड (बच्चा वार्ड) में भर्ती हो गया, जहां वह 4-5 दिन तक भर्ती रहा, लेकिन उसकी मौत हो गई. अस्पताल में भर्ती होने से पहले बच्चे और परिजनों के साथ यह सब हुआ था. यह मामला प्रदेश के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक संजय गांधी अस्पताल का है. बच्चा लगभग 250 किमी दूर से महोबा से आया था.

दरअसल, संजय गांधी अस्पताल में बिजली गिरने की वजह से गंभीर रूप से झुलसे महोबा के मनीष साहू (13) को भर्ती किया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई. अस्पताल में मनीष के परिजन हाथ में ड्रिप की बॉटल पकड़े हुए स्ट्रेचर पर बच्चे को लेकर इधर से उधर भटकते रहे. किसी तरीके से संजय गांधी अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें बर्न यूनिट में भेजा, लेकिन मनीष का दुर्भाग्य देखिए यहां बच्चे को भर्ती करने से मना कर दिया गया.

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इसके बाद परिजन मनीष को संजय गांधी अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट में ले गए, जहां से उसे बच्चा वार्ड में भेज दिया. वहां भर्ती करके मनीष का उपचार शुरू किया तो 4-5 दिन भर्ती रहा, फिर उसने दम तोड़ दिया.

इस मामले में संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक राहुल मिश्रा का कहना है, हमारे पास रोज ही इस तरीके के पेशेंट आते हैं, जब वह आते हैं तो उनके हाथों में ड्रिप होती है, अस्पताल बड़ा है, उनको सही जगह पहुंचाने में वक्त लगता है. हम मरीज को भर्ती करके तत्काल ही उसका उपचार प्रारंभ करते हैं. हमारे यहां बेहतर डॉक्टर, बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध है.

इस मामले में भी ऐसा ही हुआ था. वहीं, दूसरी ओर बच्चा वार्ड के एचओडी डॉ बजाज का कहना है, आकाशीय बिजली में मौके पर ही लोगों की मौत हो जाती है. मनीष बुरी तरीके से झुलसा हुआ था, हमने उसका उपचार करने की कोशिश की, लेकिन हम उसको बचा नहीं पाए.