छतरपुर में नौकरी बचाने की जंग: 3100 शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य

शिक्षकों में सबसे अधिक असमंजस 2005 की नियुक्तियों को लेकर है. शिक्षक संगठनों का कहना है कि व्यापमं के माध्यम से नियुक्त सभी शिक्षकों ने पहले ही कठिन प्रक्रिया पूरी की है, फिर दोबारा परीक्षा क्यों देनी पड़े. लोक शिक्षण आयुक्त ने इस मामले पर फिलहाल कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिया है.

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मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में शिक्षा विभाग ने 3100 प्राइमरी और माध्यमिक शिक्षकों को आगामी दो साल में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत जिन शिक्षकों ने पहले यह परीक्षा नहीं दी है, उन्हें जुलाई-अगस्त 2026 में प्रस्तावित परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी, अन्यथा नौकरी छूटने का खतरा है.

2017 में दायर याचिका पर सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को दो साल का समय दिया जाए. यदि जुलाई-अगस्त 2026 में टीईटी पास नहीं हुई, तो नौकरी छोड़नी पड़ सकती है. हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 साल से कम समय बचा है, उन्हें इस परीक्षा से छूट मिली है.

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2005 की नियुक्तियों को लेकर संशय

शिक्षकों में सबसे अधिक असमंजस 2005 की नियुक्तियों को लेकर है. शिक्षक संगठनों का कहना है कि व्यापमं के माध्यम से नियुक्त सभी शिक्षकों ने पहले ही कठिन प्रक्रिया पूरी की है, फिर दोबारा परीक्षा क्यों देनी पड़े. लोक शिक्षण आयुक्त ने इस मामले पर फिलहाल कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिया है.

शिक्षक संगठनों का विरोध

मप्र शासकीय शिक्षक संघ के कार्यकारी जिला अध्यक्ष कमल अवस्थी ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों का पक्ष रखने की मांग की है. यदि सरकार रिव्यू पिटीशन दाखिल नहीं करती, तो शिक्षक संगठन अपने स्तर पर कानूनी कदम उठाएंगे.

आगामी परीक्षा और जिला प्रशासन

जिला शिक्षा अधिकारी ए.एस. पॉंडिय ने बताया कि यह आदेश उन शिक्षकों के लिए है जिन्होंने अब तक टीईटी परीक्षा नहीं दी. जिले में लगभग 3100 शिक्षक चिह्नित किए गए हैं. जुलाई-अगस्त 2026 में परीक्षा प्रस्तावित है और इसकी सूचना जारी करने के निर्देश दिए गए हैं.