मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला न्यायालय ने जमीन विवाद केस में कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर सख्त रुख अपनाया है. न्यायाधीश दिव्यांशु गुप्ता ने छतरपुर कलेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नोटिस में पूछा गया है कि अदालत के आदेश की अवहेलना करने पर उनके शासकीय वाहन और कार्यालय की कुर्सी को क्यों न कुर्क किया जाए तथा उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए.
क्या है पूरा मामला?
एडवोकेट वशिष्ठ नारायण श्रीवास्तव ने बताया कि ग्राम बकायन, तहसील व जिला छतरपुर में स्थित करीब 11.12 एकड़ जमीन का पट्टा वर्ष 1960 में दयाराम काछी को मध्य प्रदेश शासन द्वारा दिया गया था. तब से लेकर वर्ष 2012 तक राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन दयाराम के नाम दर्ज रही और वे उस पर खेती करते रहे. उन्होंने वहां पक्का मकान भी बनाया और परिवार सहित निवास करते रहे.
लेकिन वर्ष 2012 में तहसीलदार ने एक शिकायत के आधार पर आदेश पारित कर जमीन पर मध्य प्रदेश शासन का नाम दर्ज कर दिया. इसके खिलाफ दयाराम ने अपील की, जो पहले खारिज हो गई.
अपील में मिला राहत
दयाराम के निधन के बाद उनके पुत्र दामोदर कुशवाहा और गोविंद दास कुशवाहा ने 2016 में षष्टम अपर जिला न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की. 26 जुलाई 2019 को अपीलीय न्यायालय ने अधीनस्थ न्यायालय का आदेश पलटते हुए फैसला दिया कि संबंधित जमीन के वैध भूमि स्वामी दामोदर और गोविंद दास ही होंगे. साथ ही जमीन पर स्थायी स्टे भी बरकरार रखा गया.
आदेश के बाद भी नहीं हुआ पालन
कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं किया गया. बाद में कमिश्नर सागर संभाग और तहसीलदार स्तर पर भी आदेश पारित हुए कि रिकॉर्ड में संशोधन कर वादी का नाम दर्ज किया जाए, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ.
वादी पक्ष ने आदेश के क्रियान्वयन के लिए फिर से व्यवहार न्यायालय में आवेदन लगाया. अदालत ने कलेक्टर को आदेश पालन कर दो सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने को कहा, लेकिन तय तारीख तक कोई पालन प्रतिवेदन पेश नहीं किया गया.
कोर्ट ने जताई नाराजगी
बार-बार आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर न्यायाधीश दिव्यांशु गुप्ता ने इसे अदालत की अवमानना मानते हुए कलेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है कि आदेश की अवहेलना, निष्पादन में असहयोग और रुकावट के कारण क्यों न कि शासकीय वाहन और कार्यालय की कुर्सी कुर्क की जाए. न्यायालय अवमान अधिनियम 1971 की धारा 12 के तहत कार्रवाई हो.
भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 210(बी) के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जाए.
अगली सुनवाई कब?
मामले में अगली पेशी 10 मार्च 2026 को तय की गई है. इस दिन कलेक्टर छतरपुर को नोटिस का जवाब देना होगा. इस मामले ने जिला प्रशासन और न्यायपालिका के बीच आदेश पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.