मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में पवित्र माह रमजान के दौरान सेहरी में बड़े आकार की डबल रोटी खाने की एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है. रोजा रखने से पहले रात के तीसरे पहर में होने वाले सेहरी भोज में लोग खास तरह की बड़ी डबल रोटी का सेवन करते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में ‘नान' कहा जाता है.
इस परंपरा की शुरुआत को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं. कुछ लोगों का मानना है कि यह परंपरा मुगलकाल से चली आ रही है, जबकि कुछ इसे यूनान से आई परंपरा बताते हैं. हालांकि एमपी के बुरहानपुर में यह परंपरा कई दशकों से चली आ रही है और आज भी रमजान के दौरान बड़े पैमाने पर निभाई जाती है. शाम होते ही शहर की बेकरी दुकानों पर इस बड़ी डबल रोटी को खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लग जाती है.
burhanpur-ramzan-sehri-tradition-big-double-roti-demand
खास सामग्री से तैयार होती है ‘नान' डबल रोटी
बुरहानपुर की स्थानीय कोहिनूर बेकरी के संचालक शब्बीर हुसैन के अनुसार रमजान के दौरान रोजेदारों के लिए विशेष रूप से यह बड़ी डबल रोटी तैयार की जाती है. इसे बनाने के लिए मैदा, शक्कर, ड्रायफ्रूट्स और दूध का मिश्रण इस्तेमाल किया जाता है.
मिश्रण तैयार करने के बाद इसे बेक करके बाजार में बेचा जाता है. बाजार में यह बड़ी डबल रोटी 10 रुपये से लेकर 50 रुपये प्रति नग तक मिलती है, जिसका वजन करीब 250 ग्राम से 500 ग्राम तक होता है.
बेकरी संचालकों का कहना है कि यह डबल रोटी केवल रमजान के महीने में ही बनाई जाती है. आम दिनों में इसे तैयार नहीं किया जाता. रोजेदारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस पर अधिक मुनाफा भी नहीं लिया जाता, ताकि हर वर्ग का व्यक्ति इसे आसानी से खरीद सके.
burhanpur-ramzan-sehri-tradition-big-double-roti-demand
रोजाना करीब 10 हजार डबल रोटी की बिक्री
बुरहानपुर में रमजान के दौरान इस बड़ी डबल रोटी की मांग काफी बढ़ जाती है. शहर में करीब दो दर्जन से ज्यादा बेकरी हैं, जहां रोजाना औसतन लगभग 10 हजार बड़ी डबल रोटी की बिक्री होती है.
शाम ढलते ही बेकरी दुकानों में इन डबल रोटियों को सजाकर रखा जाता है और सेहरी की तैयारी कर रहे लोग बड़ी संख्या में इन्हें खरीदने पहुंचते हैं. दूसरे शहरों में भी है बुरहानपुर की डबल रोटी की मांग
बुरहानपुर की यह खास डबल रोटी सिर्फ स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं है. रमजान के दौरान इसकी मांग पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के जलगांव, औरंगाबाद, अमरावती और बुलढाणा जिलों में भी रहती है. इसके अलावा मध्य प्रदेश के खंडवा, खरगोन और इंदौर तक भी इस बड़ी डबल रोटी की सप्लाई की जाती है.
burhanpur-ramzan-sehri-tradition-big-double-roti-demand
पौष्टिक और सुविधाजनक भी है यह डबल रोटी
बड़े आकार की यह डबल रोटी सस्ती होने के साथ-साथ पौष्टिक भी मानी जाती है. रोजेदार दिनभर भूखे-प्यासे रहने से पहले जब सेहरी में इसका सेवन करते हैं तो उन्हें लंबे समय तक भूख कम लगती है.
इसके अलावा रात के समय घरों में रोटी बनाने की झंझट भी नहीं रहती. रेडी-टू-ईट होने के कारण यह सेहरी के लिए बेहद सुविधाजनक भोजन बन जाता है. यही वजह है कि रमजान के महीने में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है.
ईरान-इजरायल जंग का असर: रमजान में महंगे होंगे खजूर-ड्रायफ्रूट्स, ईद से पहले 25 फीसदी तक घट सकती बिक्री