बुरहानपुर के इस गांव के लोगों ने पेश की अनूठी मिसाल: श्वान की शव यात्रा में लगा लोगों का जमावड़ा, किया गया अंतिम संस्कार 

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के लोनी गांव में पशु प्रेमी की अनूठी मिसाल देखने को मिली. यहां एक श्वान की मौत होने पर ग्रामीणों ने विधि विधान के साथ उसकी शव यात्रा निकाल कर उसका अंतिम संस्कार किया.

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Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के लोनी गांव में पशु प्रेमी की अनूठी मिसाल देखने को मिली. यहां एक श्वान की मौत होने पर ग्रामीणों ने विधि विधान के साथ उसकी शव यात्रा निकाल कर उसका अंतिम संस्कार किया. गांव के लोगों का कहना है कि यह श्वान भूषण महाजन के यहां पर 10 सालों से रह रहा था. पूरे गांव के लोग इसे प्रेम करते थे... इसे घूमाने के लिए लेकर जाते थे. लोग उसको दूध बिस्किट और अन्य वस्तुए खाने के लिए देते थे... इसकी खासियत थी कि आज तक किसी को गांव में काटा नहीं और गांव में आज तक उसने चोरी भी नहीं होने दी. रात के समय में यह घूमते रहता था.

आज अचानक उसकी मौत की सूचना जैसे ही ग्रामीणों को लगी तो कोई भी ग्रामीण काम पर नहीं गया और सभी इसकी शव यात्रा में शामिल होने के लिए आए. लोनी के शमशान घाट पर इसका अंतिम संस्कार किया गया.

श्वान की शव यात्रा में लगा लोगों का जमावड़ा

ग्राम लोनी में रहने वाले श्वान पालक भूषण महाजन ने बताया कि जब मैं अपने घर से घूमने के लिए जा रहा था तब मुझे यह श्वान का छोटा सा बच्चा दिखाई दिया. नाले के पास बैठा हुआ था. मैं अपने घर पर इसको उठा कर लाया और मैंने उसको नहला-धुला कर दूध पीने के लिए दिया. यह काफी घबराया हुआ था, लेकिन जैसे ही मैं अपने साथ इसको रखने लगा इसने खाना पीना शुरू कर दिया. मैं इसको पिछले 10 साल से पाल रहा था. मैंने इसका नाम शेरा रखा था... आज उसकी मौत हो गई.

किया गया अंतिम संस्कार 

उन्होंने बताया कि जैसे ही इसकी मौत की सूचना लोगों को लगी तो गांव के पूरे लोग मेरे घर पर आ गए और इसकी शव यात्रा में भी शामिल हुए. हमने इसका विधि विधान के साथ लोनी के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया. आगे की हिंदू रीति रिवाज के अनुसार जो भी क्रियाएं होती है वो सभी क्रियाएं भी की जाएगी.

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गांव में नहीं जले चूल्हे 

गांव के लोगों का कहना है कि इस श्वान से हमारा बहुत ही लगाव था... जैसे ही सुबह के समय में इसकी मौत की सूचना लगी तो गांव में एक भी चूल्हा नहीं जला. सबसे पहले इसका अंतिम संस्कार किया गया. कोई भी लोग काम पर नहीं गए. करीब 300 से अधिक लोग इसकी शव यात्रा में शामिल हुए. इस श्वान से गांव के सभी लोगों को बड़ा लगाव हो गया था. इसकी खासियत थी कि बच्चों को काटता नहीं था, बच्चों के साथ खेलता था. सबसे खास बात यह थी कि हमारे गांव में आज तक चोरी नहीं हुई है, क्योंकि यह श्वान रात के समय में घूमते रहता था. अनजान लोगों पर भोक्ता था, वैसे ही ग्रामीण उठ जाते थे.

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