BJP MLA Pritam Lodhi: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी माफी मांगी है. विधायक लोधी पिछले कुछ दिनों से पुलिस अधिकारियों को 'घर गोबर से भरने' और '250 किलो का हाथ' जैसी धमकियां देने के कारण विवादों में थे. ऐसे में पार्टी ने उनको नोटिस देकर जवाब मांगा था. गुरुवार को विधायक लोधी ने भोपाल में मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात कर अपने बयानों पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया है.
विवादित बयानों पर मांगी माफी
मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री मोहन यादव के निवास पर हुई इस मुलाकात में प्रीतम लोधी ने पार्टी द्वारा जारी 'कारण बताओ नोटिस' का जवाब सौंपा. लोधी ने स्पष्ट किया कि गुस्से में उनके मुंह से गलत शब्द निकल गए थे. उन्होंने कहा, "पुलिस द्वारा मेरे बेटे का जुलूस निकालने और उसे पैदल परेड कराने से मैं आहत था, जिसके कारण आवेश में आकर मैंने वे बयान दिए."
पार्टी की ओर से मिली सख्त हिदायत
भाजपा आलाकमान ने विधायक के आचरण को पार्टी अनुशासन के विरुद्ध माना है. प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि वे अपनी भाषा पर संयम रखें. भविष्य में किसी भी अधिकारी या सार्वजनिक मंच पर अभद्र टिप्पणी न करें. पार्टी की गाइडलाइन का अक्षरशः पालन करें.
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, पूरे विवाद की शुरुआत 16 अप्रैल 2026 को उस वक्त हुई थी, जब विधायक के बेटे दिनेश लोधी ने अपनी बिना नंबर वाली थार कार से करैरा में 5 लोगों को टक्कर मार दी थी. एक्सीडेंट के बाद दिनेश ने पुलिस को धमकी देते हुए कहा था कि "बाप विधायक है, मर्डर केस भी निपटा लेगा."
SDOP को धमकी व IPS एसोसिएशन की आपत्ति
एक्सीडेंट के बाद जब SDOP आयुष जाखड़ ने बेटे को थाने बुलाकर पूछताछ की, तो विधायक प्रीतम लोधी भड़क गए. उन्होंने वीडियो जारी कर अधिकारी को धमकाया और कहा कि "करैरा आपके डैडी का नहीं है." विधायक के इन बयानों पर पुलिस विभाग और आईपीएस एसोसिएशन ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसके बाद भाजपा बैकफुट पर आ गई और नोटिस जारी किया गया.
सीएम से मिलने के बाद क्या बोले प्रीतम लोधी?
माफी मांगने के साथ ही प्रीतम लोधी ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है. उन्होंने अपनी तीन पीढ़ियों का नाता भाजपा से बताते हुए पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है. मीडिया से बातचीत में प्रीतम लोधी ने कहा कि पार्टी के सामने मैंने अपना पक्ष रखा है. मैंने उस समय आवेश में आकर अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया. इसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूं.
पार्टी के सामने भी मैंने अपनी गलती स्वीकार कर खेद व्यक्त किया है. मैंने मुख्यमंत्री जी और अध्यक्ष जी के सामने अपना पक्ष रखा है. साथ ही ये मांग की है कि इस मामले की जांच कमेटी बनाकर जांच की जाए. उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा उनके बेटे पैदल परेड कराने से आहत होकर उन्होंने गुस्से में वह बयान दिया था. पार्टी आलाकमान ने उन्हें सख्त हिदायत दी है कि वे अनुशासन में रहें और अपनी भाषा पर नियंत्रण रखें.
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