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भोपाल: विधायक-सांसदों का ‘रचना टॉवर’ बना खतरे का घर! फायर सिस्टम फेल, पार्किंग की गाड़ियों में लगी आग

भोपाल के VIP रचना टॉवर में लगी आग ने फायर सेफ्टी की बड़ी लापरवाही उजागर कर दी. पार्किंग में खड़ी कार और स्कूटी में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई. 10 मंजिला इमारत में न फायर अलार्म है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम.

भोपाल: विधायक-सांसदों का ‘रचना टॉवर’ बना खतरे का घर! फायर सिस्टम फेल, पार्किंग की गाड़ियों में लगी आग

Bhopal Rachna Tower Fire: भोपाल में विधायकों और सांसदों के लिए बनाए गए रचना टॉवर में आग लगने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है. जिस इमारत को खास लोगों के रहने के लिए बनाया गया था, वहीं अब लापरवाही की वजह से खतरे का घर बनती जा रही है. पार्किंग में खड़ी गाड़ियों में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई, जबकि फायर सेफ्टी के इंतजाम लगभग नदारद निकले.

राजधानी भोपाल के रचना टॉवर में अचानक आग लगने से मौके पर हड़कंप मच गया. आग बिल्डिंग की पार्किंग में खड़ी गाड़ियों में लगी, जिसमें कई कार और बाइक जलकर खाक हो गईं. घटना के बाद लोगों में दहशत फैल गई और आनन-फानन में फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई.

पहले स्कूटी, फिर कार में भड़की आग

जानकारी के मुताबिक, आग सबसे पहले एक इलेक्ट्रिक स्कूटी में लगी. देखते ही देखते आग पास खड़ी कार तक पहुंच गई. आग इतनी तेजी से फैली कि एक कार और स्कूटी पूरी तरह जलकर खाक हो गई, जबकि एक अन्य गाड़ी को भी आंशिक नुकसान हुआ.

फायर सेफ्टी के इंतजाम पूरी तरह नाकाफी

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि 10 मंजिला इस इमारत में फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम ही नहीं हैं. बिल्डिंग में न तो फायर अलार्म मौजूद है और न ही आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी उपकरण. यहां तक कि पाइप की जगह झाड़ू रखे होने जैसी लापरवाही भी सामने आई है.

368 फ्लैट, लेकिन सुरक्षा पर सवाल

रचना टॉवर में कुल 368 फ्लैट हैं, जिनमें कई विधायकों और मंत्रियों के नाम पर आवंटन हुआ है. हालांकि इनमें से अधिकतर फ्लैट किराए पर दिए गए हैं. यहां कई पूर्व विधायक भी रहते हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर सवाल और गंभीर हो जाते हैं.

पहले भी हो चुकी है आग की घटना

यह कोई पहली बार नहीं है जब इस बिल्डिंग में आग लगी हो. इससे पहले भी यहां आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस सुधार नहीं किया गया.

स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले तीन साल से फायर सेफ्टी को लेकर लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. लापरवाही का आलम यह है कि चेतावनियों के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं.

पूर्व विधायकों ने उठाए गंभीर सवाल

पूर्व विधायक बापू सिंह तंवर और अजीत सिंह ने इस मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें इस प्रोजेक्ट में ठगा गया है. उनका कहना है कि जिस स्तर की सुरक्षा होनी चाहिए थी, वह यहां नजर नहीं आती. घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया. राहत की बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई.

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