भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा की मौत मामले में पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि समर्थ सिंह ने सरेंडर नहीं किया था, बल्कि उसे जबलपुर पुलिस के सहयोग से हिरासत में लिया गया था. रात लगभग 2 बजे पुलिस समर्थ को भोपाल के कटारा हिल्स थाने ले आई. अभी उसका मेडिकल कराया गया है, जिसके बाद उसे कोर्ट पेश किया जाएगा. कोर्ट में पुलिस समर्थ का 7 दिन का रिमांड मांगेगी.
पुलिस कमिश्नर ने आगे कहा कि कुछ प्रक्रियाओं में अभी भी समय लगता है. हम उससे आगे पूछताछ करेंगे और उसके बाद ही कुछ कह पाएंगे, क्योंकि मामले में उससे विस्तार से पूछताछ करनी है. अगर कोई ऐसी बात सामने आती है कि किसी ने उसे पनाह दी थी तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.
आरोपी को पकड़ने में देरी होने के सवाल कमिश्नर ने कहा कि पुलिस आयुक्त ने कहा कि आरोपी छिपने में लगा हुआ था, इसलिए उसे पकड़ने में 10 दिन लग गए. आरोपी का काम छिपना है और पुलिस का पकड़ना. उसकी तलाश में टीमें लगी हुई थीं, पुलिस ने कोई देरी नहीं की.
दोबारा पोस्टमॉर्टम पर क्या कहा?
वहीं, दिल्ली AIIMS आरोप लगाया था कि उन्हें ट्विशा शर्मा के दूसरे पोस्टमॉर्टम करने के संबंध में अभी तक कोई पत्र नहीं मिला है. इस पर जब पुलिस आयुक्त से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि कोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को पत्र लिखा है. हम GAD के साथ समन्वय कर रहे हैं और टीम को जल्द से जल्द यहां लाने की कोशिश कर रहे हैं. GAD भी वहां अपना काम कर रहा है और हम भी GAD के संपर्क में हैं. पोस्टमॉर्टम करने के लिए दिल्ली AIIMS से एक टीम भोपाल आएगी.
समर्थ के रिमांड का करेंगे विरोध
गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ के वकील ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा कि वह मामले में अपना पक्ष रखेंगे. कोर्ट अपना काम करेगा. जब उनसे पूछा गया कि पुलिस ने गिरिबाला को तीन नोटिस भेजे हैं और जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है. इस पर वकील ने पुलिस के दावे का इनकार किया. उन्होंने कहा कि जब भी पुलिस हमसे मिलने आई है, हमने उनसे मुलाकात की है. पुलिस समर्थ का रिमांड मांगेगी और हम उसका विरोध करेंगे.
गिरिबाला की जमानत रद्द करने के लिए दिया नोटिस
जब गिरिबाला सिंह के वकील के दावे पर पुलिस कमिश्नर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब मांगा गया तो उन्होंने कहा कि हमने उन्हें तीन नोटिस जारी किए हैं. अब वह इससे इनकार कर रही हैं, यह एक अलग बात है, लेकिन हमने नोटिस तामील कराए थे. उन पर गंभीर अपराधों का आरोप है. इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है. हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द उनसे पूछताछ की जाए. हमें एक प्रक्रिया का पालन करना होता है. हमने कोर्ट में अग्रिम ज़मानत रद्द करने के लिए भी एक नोटिस दिया है. इसमें कोई चूक नहीं है. हमने अपनी जांच निष्पक्ष और पूरी तरह से सही तरीके से की है और सब कुछ रिकॉर्ड पर है.