राजधानी भोपाल बुधवार को किसान आंदोलन की वजह से पूरी तरह राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बन गई. संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले प्रदेशभर से पहुंचे हजारों किसानों ने अपनी मांगों को लेकर राजधानी में डेरा डाल दिया. मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने भारी सुरक्षा व्यवस्था की, बैरिकेडिंग की और सड़कों पर बसें खड़ी कर दीं.
इसी दौरान कुछ किसान इन बसों पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. हालांकि पुलिस ने समझाइश देकर उन्हें नीचे उतारा और स्थिति को नियंत्रण में रखा. किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
बसों पर चढ़े किसान, लगाए नारे
मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड्स लगाए और कई बसें खड़ी कर सड़क को ब्लॉक कर दिया. इस दौरान कुछ किसान बसों पर चढ़ गए और वहीं से नारेबाजी शुरू कर दी. मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने किसानों को समझाया और उन्हें सुरक्षित नीचे उतारा. इसके बाद किसान सड़क पर बैठकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे.
CM हाउस की ओर जाने वाले रास्तों पर कड़ी सुरक्षा
किसानों के भोपाल पहुंचने के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आया. मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई और कई स्थानों पर बसें खड़ी कर रास्तों को बंद किया. मंत्री एंदल सिंह कंसाना की सुरक्षा भी बढ़ा दी. पुलिस कमिश्नर संजय कुमार खुद हालात पर नजर बनाए हुए हैं.
वॉटर कैनन चलाने की मांग पर अड़े किसान
प्रदर्शन के दौरान कुछ किसानों ने गर्मी और उमस का हवाला देते हुए वॉटर कैनन चलाने की मांग की. किसानों का कहना था कि इससे उन्हें राहत मिलेगी. हालांकि पुलिस ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और बातचीत के जरिए प्रदर्शनकारियों को शांत कराया. बाद में किसान शांतिपूर्वक नारेबाजी करते रहे.
SAF, RAF और 20 से ज्यादा थानों की पुलिस तैनात
प्रशासन ने आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. जहां किसान रुके हुए हैं, वहां से मुख्यमंत्री आवास की दूरी करीब सात किलोमीटर बताई जा रही है. किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए SAF, RAF और 20 से अधिक थानों की पुलिस तैनात की है. बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी के कारण पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया.
क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?
किसानों की सबसे बड़ी मांग एमएसपी पर शत-प्रतिशत मूंग खरीदी की है. इसके अलावा वे ई-टोकन व्यवस्था की समस्याओं का समाधान चाहते हैं. किसानों का कहना है कि उन्हें समय पर और उचित दाम पर खाद उपलब्ध कराई जाए. आंदोलन में शामिल लोगों का आरोप है कि इन मुद्दों पर लंबे समय से कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है.
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लेकर पहुंचे भोजन और पानी
आंदोलन में शामिल किसान पूरी तैयारी के साथ भोपाल पहुंचे हैं. उनके साथ चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भोजन और पेयजल की व्यवस्था की है. किसानों का कहना है कि उनके पास कई दिनों तक आंदोलन चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं और मांगें पूरी होने तक वे वापस नहीं लौटेंगे.
किसानों से चर्चा करेगी सरकार की कमेटी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किसानों से संवाद और सुझाव लेने के लिए एक कमेटी बनाई है. यह कमेटी आज विभिन्न किसान संगठनों और भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगी. कमेटी में कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मंत्री कृष्णा गौर, मंत्री विश्वास सारंग और विधायक रामेश्वर शर्मा शामिल हैं.