Madhya Pradesh News: भिंड जिले के आबकारी कार्यालय में उस वक्त अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया, जब शराब ठेकेदार राघवेंद्र कुशवाह अपने दफ्तर में घुसकर जमकर गुंडागर्दी की. ठेकेदार पर आरोप है कि उसने आबकारी अधिकारी महेश गौड़ के साथ गाली-गलौज की, उनका हाथ पकड़कर कुर्सी से खींचा और जान से मारने की धमकी तक दे डाली. घटना के दौरान ठेकेदार ने अधिकारी को दफ्तर से बाहर निकालने की कोशिश की और यहां तक कि कार्यालय में ताला डालने का भी प्रयास किया. अचानक हुए इस हंगामे से दफ्तर में मौजूद कर्मचारियों में हड़कंप मच गया. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कर्मचारियों को बीच-बचाव कर मामला शांत कराना पड़ा.
जानकारी के मुताबिक, विवाद की शुरुआत एक मामूली बात से हुई. आबकारी अधिकारी ने ठेकेदार को दफ्तर के बाहर बैठकर इंतजार करने को कहा, जिससे नाराज होकर ठेकेदार आपा खो बैठा और देखते ही देखते मामला गाली-गलौज और झूमाझटकी तक पहुंच गया. अधिकारी महेश गौड़ का आरोप है कि ठेकेदार ने अपने हिसाब से काम न करने पर उन्हें नौकरी से हटवाने की धमकी भी दी. घटना के बाद सहमे आबकारी अधिकारी ने तुरंत पुलिस अधीक्षक डॉ. असित यादव को सूचना दी. इसके बाद देहात थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ठेकेदार राघवेंद्र कुशवाह के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है.
क्या है विवाद की जड़?
बताया जा रहा है कि ठेकेदार कुछ समय से अंग्रेजी शराब की पर्याप्त सप्लाई न मिलने से नाराज था. उसने इस संबंध में आबकारी विभाग को लिखित शिकायत भी दी थी, जिसमें जिले में स्पिरिट और बीयर की कमी का मुद्दा उठाया गया था. ठेकेदार का कहना है कि सप्लाई में अनियमितता के कारण उसका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है.
ठेकेदार की सफाई और चेतावनी
मामले में ठेकेदार राघवेंद्र कुशवाह ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि वह केवल समस्या के समाधान के लिए दफ्तर गया था. उसने ग्वालियर के ब्रांड अधिकारी पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि समय पर पर्याप्त मात्रा में अंग्रेजी शराब उपलब्ध नहीं कराई जा रही है. ठेकेदार ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सप्लाई की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वह लाइसेंसी फीस जमा नहीं करेगा. साथ ही उसने मांग की है कि या तो पर्याप्त मात्रा में शराब की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए या लाइसेंस फीस में कटौती की जाए. इसके अलावा उसने संबंधित ब्रांड अधिकारी को पद से हटाने की भी मांग उठाई है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है. इस घटना ने न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है.
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