पद्मश्री सम्मान से पहले भगवानदास रैकवार का निधन, बुंदेली मार्शल आर्ट के लिए छोड़ी थी सरकारी नौकरी

Bhagwandas Raikwar Death News: पद्मश्री से सम्मानित बुंदेली मार्शल आर्ट के महान कलाकार भगवानदास रैकवार का 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया, जिससे कला जगत में शोक की लहर है.

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सागर (MP) के बुंदेली मार्शल आर्ट के दिग्गज भगवानदास रैकवार का निधन, पद्मश्री से होने वाले थे सम्मानित
Honey Dubey

Bhagwandas Raikwar Death News: मध्य प्रदेश के सागर जिले में बुंदेली मार्शल आर्ट के प्रख्यात कलाकार भगवानदास रैकवार का 18 अप्रैल 2026 को निधन हो गया.वे 83 वर्ष के थे और पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे.उनका इलाज भोपाल के एक निजी अस्पताल में चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली.उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है.

जीवनभर कला को समर्पित किया

भगवानदास रैकवार ने अपना पूरा जीवन बुंदेली मार्शल आर्ट के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दिया.उनका समर्पण इतना गहरा था कि उन्होंने सरकारी नौकरी तक छोड़ दी और इस पारंपरिक युद्धकला को नई पहचान दिलाने में जुट गए. उन्होंने न केवल इस कला को जीवित रखा, बल्कि इसे नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया. 

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Bhagwandas Raikwar Passed Away in Sagar MP, Padma Shri Awardee for Bundeli Martial Art

भगवानदास रैकवार के बेटे राजकुमार रैकवार ने उनके निधन की पुष्टि की है. उनका अंतिम संस्कार 19 अप्रैल को सागर के नारियाबली नाका स्थित मुक्तिधाम में किया जाएगा। अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में उनके शिष्य, प्रशंसक और आमजन शामिल होंगे।

पद्मश्री से सम्मानित होने वाले थे

केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित किया था.यह सम्मान उन्हें बुंदेली मार्शल आर्ट में उनके अतुलनीय योगदान के लिए दिया जाना था. हालांकि, यह सम्मान मिलने से पहले ही उनका निधन हो जाना कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है.उन्हें यह पुरस्कार 26 अगस्त 2026 को दिए जाने का प्रस्ताव था. 

Bhagwandas Raikwar Passed Away in Sagar MP, Padma Shri Awardee for Bundeli Martial Art
Photo Credit: Honey Dubey

देश-विदेश तक पहुंचाई पहचान

भगवानदास रैकवार ने बुंदेलखंड की इस पारंपरिक कला को स्थानीय दायरे से बाहर निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया.उन्होंने कई राज्यों और विदेशों में प्रदर्शन कर इस कला की विशिष्ट पहचान बनाई. उनके प्रयासों के कारण आज बुंदेली मार्शल आर्ट को अलग पहचान मिली है.

सैकड़ों युवाओं को दी नई दिशा

उनके शिष्यों के अनुसार, वे केवल कलाकार ही नहीं बल्कि एक प्रेरणास्रोत भी थे.उन्होंने सैकड़ों युवाओं को इस कला से जोड़ा और उन्हें अनुशासन, आत्मरक्षा और सांस्कृतिक विरासत का महत्व सिखाया. उनके प्रशिक्षण में परंपरा और समर्पण का विशेष महत्व रहता था.

अंतिम विदाई की तैयारियां

उनके निधन से बुंदेलखंड क्षेत्र में गहरा शोक है.परिजन, मित्र और कला प्रेमी उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.सोशल मीडिया पर भी लोग उनके योगदान को याद कर रहे हैं. अंतिम संस्कार की तैयारियां जारी हैं, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है.जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी श्रद्धांजलि देने पहुंच सकते हैं. 

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