'सच छिपाकर की शादी...' कोर्ट ने 10 साल पुराने विवाह को खत्म किया, बेटे की कस्टडी पर फैसला बाकी   

Legal Verdict, Marriage Annulled After 10 Years as Woman Fails to Prove Previous Divorce: बैतूल में साल 2011 में शादी के बाद एक महिला ने 2015 में दूसरी शादी कर ली. इसकी जानकारी उसके दूसरे पति को नहीं दी गई. महिला के पास तलाक के वैध दस्तावेज भी नहीं थे. ऐसे में कोर्ट ने इस शादी को शून्य घोषित कर दिया.

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Amla Court Declares 10-Year-Old Marriage Null and Void in Betul.

Amla Court Declares 10-Year-Old Marriage Null and Void in Betul: बैतूल जिले की आमला जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने साल 2015 में हुए एक विवाह को शून्य (अमान्य) घोषित कर दिया. अदालत ने अपने फैसले में कहा- विवाह हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5 के प्रावधानों के विपरीत था, क्योंकि महिला का पहले से विवाह मौजूद था, तलाक का वैधानिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया. 

दरअसल, यह मामला आमला निवासी एक युवक द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था. याचिकाकर्ता ने न्यायालय को बताया कि उसका विवाह 13 अगस्त 2015 को छिंदवाड़ा निवासी युवती से हुआ था. विवाह के कुछ समय बाद उसे जानकारी मिली कि महिला का पहला विवाह वर्ष 2011 में हो चुका था और उसका विधिवत तलाक नहीं हुआ था. पति ने आरोप लगाया कि शादी से पहले उससे यह जानकारी छिपाई गई थी. 

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पति पर दर्ज कराए थे केस 

युवक ने याचिका में यह भी बताया गया कि शादी के बाद से पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद हो रहे हैं. महिला द्वारा दहेज प्रताड़ना और भरण-पोषण से जुड़े मामले भी दर्ज कराए गए थे. उसका यह भी कहना था कि महिला उसके साथ वैवाहिक जीवन नहीं निभाना चाहती थी. 

तलाक के दस्तावेज नहीं किए पेश 

युवक के अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय के अनुसार, सुनवाई के दौरान अदालत ने दस्तावेजों, गवाहों और शपथ पत्रों की गहन जांच की. इसके बाद न्यायालय ने माना कि नोटरी के समक्ष दिया गया शपथ पत्र हिंदू रीति-रिवाजों से संपन्न वैध विवाह समाप्त होने का पर्याप्त प्रमाण नहीं माना जा सकता. साथ ही महिला के पहले विवाह के समाप्त (तलाक) होने संबंधी कोई वैधानिक दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किया गया था. 

बेटे की कस्टडी को लेकर मामला लंबित

इसके बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत 13 अगस्त 2015 के विवाह को निरस्त कर दिया. दंपती का एक 8 वर्षीय बेटा भी है, जिसकी कस्टडी को लेकर अलग से न्यायालय में मामला लंबित है. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां पूर्व वैवाहिक स्थिति छिपाकर विवाह किए जाते हैं. 

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