बड़वानी में बेटियों ने दी पिता को मुखाग्नि, अंतिम संस्कार की परंपरा निभाकर दिया समाज को संदेश

Barwani News: बड़वानी के अंजड में बेटियों ने रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़ते हुए अपने पिता के अंतिम संस्कार की सभी परंपराएं खुद निभाईं. उन्होंने न केवल पिता के पार्थिव शरीर को कंधा दिया, बल्कि श्मशान घाट पर चिता को मुखाग्नि भी दी.

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Madhya Pradesh Hindi News: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बड़वानी (Barwani) में दो बेटियों ने अपने पिता के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाकर एक नई मिसाल पेश की है. उन्होंने सामाजिक परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए न केवल पिता के पार्थिव शरीर को कंधा दिया, बल्कि श्मशान घाट पर चिता को मुखाग्नि भी दी. यह दृश्य अंजड के मुक्तिधाम पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया और समाज को बराबरी का संदेश दिया.

बेटियों ने दी पिता को मुखाग्नि

दरअसल, अंजड के वार्ड क्रमांक 3 सिर्वी महोल्ला निवासी प्रभु दयाल गुप्ता का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वो सेवानिवृत्त शिक्षक थे. उनकी तीन बेटियां -अर्चना, छाया और सबसे छोटी बेटी श्वेता हैं. 

अंतिम संस्कार की परंपरा निभाकर दिया समाज को संदेश

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, अंतिम संस्कार की रस्में बेटे द्वारा निभाई जाती हैं, लेकिन इन बेटियों ने यह धारणा तोड़ते हुए खुद पिता को अंतिम विदाई दी. अर्चना और छाया ने भावुक मन से पिता के शव को कंधा दिया और मुखाग्नि देकर अपने कर्तव्य का निभाया. तो वहीं छोटी बेटी श्वेता घर पर अपनी मां को संभालने में लगी रही.

मुक्तिधाम पर भावुक हुआ माहौल

इस दौरान वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो उठे. बेटियों के इस साहसिक और संवेदनशील कदम ने न केवल अपने पिता को श्रद्धांजलि दी, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि बेटा और बेटी में कोई भेद नहीं होता. सच्चा कर्तव्य और संस्कार प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी से निभाए जाते हैं, न कि केवल परंपराओं से...

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