‘अमृत काल’ में भी बदहाली:  झिरिया का गंदा पानी, अंधेरे में जिंदगी-संरक्षित जनजाति की चौंकाने वाली  हकीकत 

Baiga Tribe in Anuppur: हर घर जल जैसी योजनाओं के दावों के बीच इस गांव की हकीकत अलग तस्वीर पेश करती है. यहां के लोग आज भी पानी के लिए प्राकृतिक झिरिया पर निर्भर हैं. गर्मियों में यह झिरिया सूख जाती है, जबकि बरसात में इसमें गंदा और दूषित पानी भर जाता है. मजबूरी में ग्रामीण उसी पानी का इस्तेमाल करते हैं, जिससे सेहत संबंधी परेशानी बढ़ने का खतरा बना रहता है.

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Baiga Tribe Lifesyle: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के अनूपपुर (Anuppur) जिले के पुष्पराजगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत गोंदा का पकरीपानी गांव विकास की मुख्यधारा से अब भी कोसों दूर है. लगभग 300 की आबादी वाले इस संरक्षित बैगा समुदाय के गांव में करीब 70 परिवार निवास करते हैं, लेकिन यहां आज भी पक्की सड़क, नियमित पेयजल और स्थायी बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. ग्रामीणों का कहना है कि आखिरी बार साल 1994–95 में यहां ग्रेवल सड़क का निर्माण हुआ था. इसके बाद सड़क उन्नयन की कोई पहल नहीं हुई. बरसात के मौसम में कीचड़ और दलदल के कारण गांव तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है.

हर घर जल जैसी योजनाओं के दावों के बीच इस गांव की हकीकत अलग तस्वीर पेश करती है. यहां के लोग आज भी पानी के लिए प्राकृतिक झिरिया पर निर्भर हैं. गर्मियों में यह झिरिया सूख जाती है, जबकि बरसात में इसमें गंदा और दूषित पानी भर जाता है. मजबूरी में ग्रामीण उसी पानी का इस्तेमाल करते हैं, जिससे सेहत संबंधी परेशानी बढ़ने का खतरा बना रहता है.

 बिजली के खंभे तो आए, रोशनी नहीं

गांव में बिजली के खंभे और तार तो लगाए गए हैं, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार नियमित सप्लाई नहीं होती. कई बार महीनों तक बिजली नहीं आती, जिससे लोग अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है.

 कावर के सहारे अस्पताल की राह

सड़क न होने का सबसे बड़ा असर आपात स्थितियों में दिखाई देता है. बीमार, गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्गों को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती है. ऐसे में ग्रामीण कावर (डोली) के सहारे कई किलोमीटर दूर पैदल मरीज को ले जाते हैं. यह स्थिति विशेष रूप से बरसात के मौसम में और भी गंभीर हो जाती है.

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इन समस्याओं से त्रस्त होकर बैगा समुदाय के ग्रामीण हाल ही में कलेक्ट्रेट पहुंचे और बिजली, पानी व सड़क की मांग को लेकर आवेदन सौंपा. ग्रामीणों ने बताया कि वे आपस में चंदा जुटाकर जिला मुख्यालय पहुंचे थे, हालांकि उनकी कलेक्टर से मुलाकात नहीं हो सकी. अपर कलेक्टर दिलीप पाण्डेय ने कहा है कि ग्रामीणों की समस्याओं की जानकारी ली गई है और संबंधित विभागों को परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे. अब गांव के लोगों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित अन्य योजनाओं के माध्यम से उन्हें भी बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी और दशकों पुरानी बदहाली से राहत मिलेगी.

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