अशोकनगर दुष्कर्म‑धर्मांतरण केस में नया मोड़, संत समाज ने खोला मोर्चा, ट्रांसजेंडर कनेक्शन की जांच की मांग

अशोकनगर में नाबालिग बच्चियों से जुड़े दुष्कर्म और कथित धर्मांतरण मामले में नया मोड़ आ गया है. संत समाज ने इस केस में ट्रांसजेंडर कनेक्शन की गहराई से जांच की मांग की है. वहीं ट्रांसजेंडर समुदाय ने आरोपों पर नाराजगी जताते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की अपील की है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

Ashoknagar Rape Conversion Case: अशोकनगर में नाबालिग बच्चियों से जुड़े दुष्कर्म और कथित धर्मांतरण के मामले ने अब नया रूप ले लिया है. इस प्रकरण में मध्य प्रदेश के संत समाज ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है. संत समाज का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर इस केस में कुछ ट्रांसजेंडर्स की भूमिका की भी गहराई से जांच होनी चाहिए. वहीं, दूसरी ओर ट्रांसजेंडर समुदाय ने आरोपों पर आपत्ति जताते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है.

संत समाज का आरोप है कि इस मामले में नाबालिग बच्चियों को फंसाने और उनसे संपर्क बढ़ाने में कुछ ट्रांसजेंडर लोग शामिल थे. संत समाज के प्रमुखों का कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए.

Advertisement

आपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग

महामंडलेश्वर अनिलानंद महाराज, संत समाज प्रमुख (मध्यप्रदेश) ने पुलिस से मांग की कि ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े आपराधिक मामलों की जानकारी सार्वजनिक की जाए. संत समाज का कहना है कि भोपाल समेत कई इलाकों से ऐसे मामलों की शिकायतें सामने आ रही हैं. उनका कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो संत समाज सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा.

कड़े नियम और निगरानी की मांग

संत समाज ने यह भी मांग रखी है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं, उन्हें चिन्हित कर तय दायरे में रहने के निर्देश दिए जाएं. संत समाज का कहना है कि परंपरागत तौर पर बधाई मांगने वाले कुछ लोग अब आपराधिक गतिविधियों में कथित रूप से शामिल हो रहे हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय है.

ट्रांसजेंडर समुदाय ने जताई नाराजगी

मामले में नाम आने के बाद ट्रांसजेंडर समुदाय की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है. देवी रानी किन्नर का कहना है कि पूरा समुदाय अपराधी नहीं है और वे हमेशा समाज का हिस्सा रहे हैं. समुदाय की ओर से कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति अपराध करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय को बदनाम न किया जाए.

पुलिस ने दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा

संजय कुमार, पुलिस कमिश्नर भोपाल का कहना है कि कानून के सामने सभी बराबर हैं. पुलिस के अनुसार अपराधी की पहचान उसके कृत्य से होती है, न कि उसकी पहचान या जेंडर से. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में भी निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है, और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.

Advertisement

संविधान की बराबरी, अपराध पर सख्ती

कानून विशेषज्ञों और प्रशासन का कहना है कि संविधान हर नागरिक को बराबरी का अधिकार देता है. अपराध किसी जाति, धर्म या जेंडर से जुड़ा नहीं होता. लेकिन अगर कोई गंभीर अपराध सामने आता है, तो सजा भी उतनी ही सख्त होनी चाहिए, चाहे आरोपी किसी भी समुदाय से हो.

पहले के मामलों का भी जिक्र

इस विवाद के बीच कुछ पुराने मामलों का हवाला भी दिया जा रहा है, जिनमें आपसी विवाद, हिंसा, आत्महत्या के प्रयास, धर्मांतरण के आरोप और चाकूबाजी जैसी घटनाएं शामिल रही हैं. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि हर मामला अलग होता है और सभी की जांच स्वतंत्र रूप से की जाती है. 

Advertisement