4 घंटे तक मलबा हटाता रहा बेटा, नहीं पता था अंदर दबे हैं पिता-मामा, अनूपपुर हादसे की दिल तोड़ देने वाली कहानी

Anuppur Lodge Collapse: कोतमा में अग्रवाल लॉज गिरने की घटना में एक बेटा 4 घंटे तक रेस्क्यू करता रहा, लेकिन उसे नहीं पता था कि मलबे में उसके अपने ही दबे हैं.

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Anuppur Lodge Collapse: जेसीबी चालक हेमराज की दर्दनाक कहानी: जिनको बचा रहा था, वही निकले उसके पिता और मामा

Anuppur Lodge Collapse: मध्‍य प्रदेश के अनूपपुर के कोतमा बस स्टैंड पर हुए अग्रवाल लॉज हादसे ने सिर्फ एक इमारत नहीं गिराई, बल्कि कई जिंदगियां उजाड़ दीं. सबसे दर्दनाक कहानी उस बेटे की है, जो 4 घंटे तक जेसीबी चलाकर मलबा हटाता रहा, लोगों को बचाने की कोशिश करता रहा… लेकिन उसे यह नहीं पता था कि उसी मलबे के नीचे उसके अपने पिता और मामा दबे हुए हैं. एक फोन कॉल ने उसकी दुनिया हमेशा के लिए बदल दी. 

चंद सेकेंड में जमींदोज हुई इमारत

शनिवार शाम करीब 5:36 बजे कोतमा बस स्टैंड स्थित अग्रवाल लॉज अचानक भरभराकर गिर गया. इमारत कुछ ही सेकेंड में मलबे में तब्दील हो गई.  हादसे के तुरंत बाद आसपास के लोगों ने मलबे में दबे लोगों की आवाजें सुनीं और बिना देर किए बचाव में जुट गए. स्थानीय लोगों ने 2 पुरुष और 1 महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. हालांकि प्रशासनिक राहत टीम को मौके पर पहुंचने में करीब 35 मिनट का समय लग गया. 

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JCB चालक हेमराज यादव का VIDEO

जिसे नहीं पता था… वो अपने ही अपनों को ढूंढ रहा था

इस हादसे की सबसे मार्मिक कहानी जेसीबी चालक हेमराज यादव की है. हादसे के बाद वह नगर पालिका की जेसीबी लेकर मौके पर पहुंचे और लगातार मलबा हटाकर लोगों को बचाने में जुट गए. करीब 4 घंटे तक वे बिना रुके रेस्क्यू ऑपरेशन करते रहे. उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस मलबे को वो हटाने की कोशिश कर रहे हैं, उसी के नीचे उनके अपने पिता और मामा दबे हुए हैं.

फिर अचानक अस्पताल से एक फोन आया…और सब कुछ बदल गया. उन्हें बताया गया कि मलबे में दबे उनके पिता की मौत हो चुकी है और उनका शव निकाल लिया गया है, जबकि मामा अब भी लापता हैं. यह सुनते ही हेमराज अस्पताल की ओर दौड़ पड़े. 

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20 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन

इस भीषण हादसे में करीब 20 घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. NDRF और डॉग स्क्वायड की टीमों ने युद्ध स्तर पर काम किया. रेस्क्यू के दौरान कुल 6 लोगों को बाहर निकाला गया. 3 लोगों की मौत हो गई. 3 लोगों को जिंदा बचा लिया गया. घायलों में से 2 को गंभीर हालत में शहडोल मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जबकि एक महिला का इलाज जिला अस्पताल अनूपपुर में चल रहा है.

मंत्री मौके पर डटे रहे, CM ने की मदद की घोषणा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर खादी एवं ग्राम उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल घटना के कुछ ही समय बाद मौके पर पहुंच गए और रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने तक वहीं मौजूद रहे. वहीं जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप अहिरवार भी रातभर का सफर तय कर सुबह 4 बजे घटनास्थल पहुंचे और हालात का जायजा लिया. रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 9-9 लाख रुपये और घायलों को 2.50-2.50 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की. 

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