एनेस्थीसिया का हाई डोज और 23 दिन का संघर्ष: नहीं रहीं एम्स भोपाल की होनहार डॉ.रश्मि

Dr Rashmi Verma Suicide Case:भोपाल एम्स की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा का 23 दिनों के संघर्ष के बाद निधन हो गया . एनेस्थीसिया के हाईडोज से आत्महत्या के प्रयास के बाद वह वेंटिलेटर पर थीं . विभाग में काम के दबाव और गुटबाजी के आरोपों के बीच हुई इस मौत ने दिल्ली तक हलचल मचा दी है और एचओडी को पद से हटा दिया गया है

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AIIMS Bhopal Doctpr Death:भोपाल के चिकित्सा जगत और एम्स (AIIMS) परिवार के लिए सोमवार का दिन एक ऐसे घाव की तरह है जो शायद ही कभी भर पाए. एम्स भोपाल की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.रश्मि वर्मा,जो पिछले 23 दिनों से वेंटिलेटर पर मौत और जिंदगी के बीच जंग लड़ रही थीं, सोमवार सुबह हार गईं. उनकी सांसें थमने के साथ ही एक होनहार करियर का दुखद अंत हो गया. यह केवल एक डॉक्टर की मौत नहीं है, बल्कि उन सवालों की गूंज है जिसने दिल्ली तक के गलियारों को हिलाकर रख दिया है.

एक इंजेक्शन और खामोश हो गई मुस्कान

डॉ.रश्मि की इस हालत की शुरुआत करीब तीन सप्ताह पहले हुई थी, जब उन्होंने कथित तौर पर एनेस्थीसिया का हाई डोज इंजेक्शन खुद को लगा लिया था. आत्महत्या के इस प्रयास ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया. एनेस्थीसिया के उस घातक प्रभाव से उनका दिल कुछ पल के लिए रुक गया और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन न पहुँचने के कारण 'ब्रेन डैमेज' हो गया. 23 दिनों तक एम्स के ही आईसीयू में उन्हें बचाने की जद्दोजहद चलती रही, लेकिन तमाम चिकित्सकीय प्रयास और दुआएं उन्हें वापस लाने में नाकाम रहीं.

काम का बोझ या गुटबाजी की बलि?

डॉ. रश्मि के इस आत्मघाती कदम के पीछे की वजहें बेहद परेशान करने वाली हैं. बताया जा रहा है कि वह पिछले काफी समय से काम के अत्यधिक दबाव और विभाग के भीतर चल रही कथित गुटबाजी से बेहद परेशान थीं. एक डॉक्टर जो दूसरों का तनाव दूर करने की काबिलियत रखती थी, वह खुद सिस्टम के भीतर चल रही खींचतान की शिकार हो गई. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी हस्तक्षेप किया है. मामले की जांच के लिए एक गोपनीय कमेटी बनाई गई थी.

विभाग में बड़ी कार्रवाई और शोक

रश्मि के इस कदम के बाद एम्स प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए एनेस्थीसिया विभाग के एचओडी (HOD) डॉ. मोहम्मद यूनुस को उनके पद से हटा दिया है. संस्थान के भीतर चल रही इस उठापटक के बीच सोमवार सुबह जब डॉ. रश्मि ने अंतिम सांस ली, तो पूरे चिकित्सा समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई.उनके साथी डॉक्टरों और स्टाफ का कहना है कि यह एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकेगी.

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इंसाफ के इंतजार में अंतिम विदाई

डॉ. रश्मि का पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया है. एम्स परिसर में आज सन्नाटा है, लेकिन हवाओं में कई अनकहे सवाल तैर रहे हैं. एक बेटी जिसने डॉक्टर बनकर समाज की सेवा का सपना देखा था, उसे किन हालातों ने इस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया? अस्पताल के गलियारों में आज डॉ. रश्मि की कमी खल रही है, और हर आंख बस यही पूछ रही है कि क्या समय रहते उनकी पीड़ा को समझा जा सकता था.
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